मानवाधिकार-एक संक्षिप्त जानकारी

 

डाॅ. अहिल्या तिवारी

सहायक प्राध्यापक, अध्यापक षिक्षा संस्थान पं. रविषंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर

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मानव अधिकार मूल रूप से वे अधिकार हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति को इंसान होने के कारण मिलते हैं। ये अधिकार नगरपालिका से लेकर अंतर्राष्ट्रीय कानून तक कानूनी अधिकार के रूप में संरक्षित है। मानवाधिकार मापदंडों का एक स्वरूप है जो मानव व्यवहार के कुछ मानकों को चित्रित करता है और व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के प्रदान किया जाता है। हालांकि इन अधिकारों को कानून द्वारा संरक्षित किया गया है, लेकिन फिर भी इनमें से कई अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति को इन अधिकारों का हक मिले इसके लिए आवश्यक है इन अधिकारों की जानकारी का होना। हर व्यक्ति को अपने अधिकार की जानकारी होने के साथ ही कानूनी संरक्षण की भी जानकारी का होना भी आवश्यक है।

 

ज्ञम्ल्ॅव्त्क्ैरू मानवाधिकार, गोपनीयता, न्यायाधिकरण, आत्मसम्मान, उपनिवेशवाद, सार्वभौमिक, कानूनी संरक्षण, जागरूकता।

 

 

 

प्रस्तावना:-

भूमिका -

मानव अधिकारों से अभिप्राय मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता से है जिसके सभी मानव प्राणी हकदार है। अर्थात उनमें नागरिक और राजनैतिक अधिकार सम्मिलित हैं। जैसे कि जीवन जीने का अधिकार, स्वतंत्र रहने का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के सामने समानता एवं आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के साथ ही साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार, भोजन एवं रोजगार के साथ-साथ समान शिक्षा का अधिकार भी शामिल है।

 

 

मानव अधिकार मूल रूप से वे अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को इंसान होने के कारण मिलते है। ये नगरपालिका से लेकर अंतर्राष्ट्रीय कानून तक कानूनी अधिकार के रूप में संरक्षित है। मानव अधिकार सार्वभौमिक हैं इसलिए ये हर जगह और हर समय लागू होतेे हैं, जो हर व्यक्ति को उसके लिंग, जाति, पंथ, धर्म, राष्ट्र, स्थान या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना दिए गए हैं। अर्थात मानव अधिकर वे मानदंड हैं जो मानव व्यवहार के मानकों को स्पष्ट करते हैं।1

 

मानव संरक्षण अधिनियम 1993 के अनुसार-

’’मानव अधिकारों का मतलब संविधान द्वारा प्रत्याभूत या अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में निहित और भारत न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा संबंधित अधिकार हैे।’’

 

 

मानव अधिकार आयोगः

मानव अधिकार आयोग की स्थापना 16 फरवरी 1947 को आर्थिक सामाजिक परिशद के एक प्रस्ताव द्वारा किया गया जिसमें 18 सदस्य थे। वर्तमान में 32 सदस्य है। विशेष परिस्थियों में हम अपने अधिकारों के लिए मानव अधिकार आयोग से शिकायत कर सकते हैं। मानव अधिकार आयोग द्वारा तैयार सार्वभौमिक घोषणा पत्र के प्रारूप को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसम्बर 1948 को स्वीकार किया इसलिए इस तारीख को मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस घोषणा पत्र में 30 अनुच्छेद हैं।

 

भारत में राश्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक स्वतंत्र विधिक संस्था है। इसकी स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुयी थी। इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत की गई। यह आयोग देश में मानवाधिकारों का प्रहरी है, यह संविधान द्वारा अनिश्चित तथा अंतर्राष्ट्रीय संधियों में निर्मित व्यक्तिगत अधिकारों का संरक्षक है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली है।

 

मानव संरक्षण अधिकार अधिनियम 1993 के आधार पर राज्य स्तर पर राज्य मानवाधिकार आयोग बना। एक राज्य मानवाधिकार आयोग भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची और समवर्ती सूची के अंतर्गत शामिल विषयों से संबंधित अधिकारों के उल्लंघन की जाँच कर सकता है। वर्तमान में भारत के 24 राज्यों में राज्यस्तरीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया है।2

 

सार्वभौमिक मानव अधिकारों में स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा, भाषण की स्वतंत्रता, सक्षम न्यायाधिकरण, भेदभाव से स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता का अधिकार और इसे बदलने के लिए स्वतंत्रता, विवाह और परिवार के अधिकार, आंदोलन की स्वतंत्रता, संपत्ति का अधिकार, शिक्षा के अधिकार, शांतिपूर्ण विधानसभा और संघ के अधिकार, गोपनीयता, परिवार, घर और पत्राचार से हस्तक्षेप की स्वतंत्रता, सरकार में और स्वतंत्र रूप से चुनाव में भाग लेने का अधिकार, राय और सूचना के अधिकार, पर्याप्त जीवन स्तर के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा का अधिकार और सामाजिक आदेश का अधिकार जो इस दस्तावेज को अभिव्यक्त करता हो आदि शामिल है।3

ब्रिटिश उपनिशदवाद के दौरान लोगों के नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक अधिकारों के उल्लंघन के विरूद्ध भारतीय संघर्ष को ध्यान में रखते हुए ही मानव अधिकार को सृजित किया गया।4

 

मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा-पत्र -

मानव अधिकारों आयोग द्वारा तैयार सार्वभौमिक घोषणा पत्र के प्रारूप को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसम्बर 1948 को स्वीकार किया। इस घोषणा पत्र में प्रस्तावना सहित कुछ 30 अनुच्छेद हैं -

 

     अनुच्छेद 1-3 तक के अनुच्छेद का संबंध नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों से है; जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि मनुष्य जन्म से ही गरिमा एवं सम्मान के अधिकारी है। जहाँ वह जन्म लेता है, वहाँ के नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार स्वतः उसे प्राप्त हो जाता है।

     अनुच्छेद 3-21 तक के अनुच्छेद में जीवन, स्वतंत्रता एवं सुरक्षा का अधिकार, समान कानूनी अधिकार, सरकारी नौकरी का अधिकार, सार्वजनिक कार्यों में भाग लेने का अधिकार सम्मिलित है।

     अनुच्छेद 21-27 तक के अनुच्छेद में व्यक्ति के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक अधिकार आते हैं; जिसमें मनुष्य के आत्मसम्मान, समान कार्य एवं समान वेतन, अतिरिक्त कार्य करने का अधिकार समावेशित हैं।

     अनुच्छेद 28-30 तक के अनुच्छेदों में सामान्य अधिकारों का उल्लेख किया गया है; जिसमें सभी मनुष्यों को सामाजिक एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के साथ ही विष्व शांति और सुरक्षा तथा व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास का पूर्ण अवसर प्राप्त हो सके।

 

मानव अधिकार के प्रकार -

     प्राकृतिक अधिकार -

इस अधिकार के अंतर्गत जीवन जीने का अधिकार आते हैं। ये स्वभाव में निहित है।

     मौलिक अधिकार -

यह मनुष्य के मूल अधिकार हैं।

 

 

 

 

 

 

     कानूनी अधिकार-

प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के कानून के समक्ष समान मानना, कानूनी संरक्षण का अधिकार।

     नागरिक एवं राजनैतिक अधिकार -

राज्य के नागरिक होने के नाते वोट देने का अधिकार।

     नैतिक अधिकार

व्यक्ति के वे नैतिक आदर्श, मानव जिन्हें समाज में प्राप्त करने का अधिकार रखता है।

     आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अधिकार

मनुष्य के आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए आवष्यक अधिकार।

 

मानव अधिकारों से संबंधित संस्थाएँः-

विश्व में मानव अधिकारों से संबंधित ऐसी बहुत-सी सरकारी एवं गैरसरकारी संस्थाएँ तथा छळव् कार्यरत हैं, जो मानव अधिकारों के संरक्षण, प्रशिक्षण तथा जागरूकता के लिए कार्य करते हैं। इस कार्य के लिए इन संस्थाओं को सम्मानित भी किया जाता है।

1.    विश्व मानव अधिकार आयोग-1990 में स्थापना, 159 सदस्य, स्थान जिनेवा।

2.    लोक संघ संगठन-विभिन्न मानवाधिकारों के हनन संबंधी घटनाओं पर आवाज उठाना।

3.    मानवाधिकार शिक्षा एशियन संगठन-1995 में मध्यप्रदेश में स्थापना, मानव के अधिकारों के प्रति जागरूकता हेतु विभिन्न कार्य।

4.    ह्यूमन राइट्स वाॅच-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत स्वयंसेवी संस्था, न्यूयाॅर्क में मुख्यालय, इसके द्वारा देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिवेदन तैयार किया जाता है तथा सभी देशों को एक क्रम दिया जाता है।

5.    एमनेस्टी इन्टरनेशनल-विश्वभर में सर्वाधिक सक्रिय संस्था जिसका मुख्यालय लंदन है। यह संगठन भारत में कश्मीर सुरक्षा बलों द्वारा मान अधिकारों के हनन एवं समाज के विभिन्न तबकों के मानवाधिकार के हनन पर प्रतिवेदन तैयार करता है।

 

ये संस्थाएँ मानव अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने की दिशा में काम करते हैं, ताकि लोगों को उनके अधिकारों के बारे में अच्छी जानकारी मिल सके। मानव अधिकारों के दुरूपयोग की जाँच करने के लिए ही संयुक्त जाँच समिति की स्थापना की गई है। कई राष्ट्रीय संस्थान, गैर-सरकारी संगठन और सरकार भी यह सुनिश्चित करने के लिए इन पर नज़र रखती हैं कि कहीं किसी व्यक्ति के मूल अधिकारों का हनन तो नहीं हो रहा है।

 

निष्कर्षः-

कहा जा सकता है कि मानव अधिकार हर व्यक्ति को दिए गए मूल अधिकार हैं। इन अधिकारों के प्रति कानून जितना जरूरी है, उतना ही आवष्यक है लोगों में इन अधिकारों के प्रति जागरूकता होना; क्योंकि हमारे समाज की सबसे बड़ी कमजोरी है जागरूकता की कमी। हम अपनी आवष्यकता की पूर्ति करने के लिए साधन तो तलाशते हैं, परन्तु अपने अधिकारों को जानने की कोशिश कम ही करते हैं और समझौतों पर बल देते हैं।

 

संदर्भ -

1.     Devi, V (2007) The Institute of Human Right Education: Indian Experience, Asian School.

2.     Kumar Raj (2003), Women’s role in Indian Nation Movement.

3.     Lavania, Sociological Research of Women, Jaipur Publication, New Delhi.

4.     Mahanti, J. (2003). Human Right Education, New Delhi: Deep & Deep Publication Pvt. Ltd.

 

 

 

 

 

 

Received on 06.02.2019                Modified on 10.02.2019

Accepted on 20.02.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(1):36-38.