गंदी बस्ती में सामाजिक एवं भौतिक परिवेश का महिलाओं पर प्रभाव (बिलासपुर नगर के विशेष संदर्भ में

Dr. Aradhana Pandel1, Dr.L.S.Gajpal2

1Research Scholar, SoS in Sociology and Social work, Pt.R.S.U. Raipur

2Associate Professor, SoS in Sociology and Social work, Pt.R.S.U. Raipur

*Corresponding Author E-mail: aradhnakhare11@gmail.com

 

ABSTRACT:

अध्ययन हेतु बिलासपुर नगर 48 वार्ड में विभक्त है अध्ययन हेतु अध्ययन क्षेत्र को 4 जोन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पष्चिम में विभक्त कर प्रत्येक जोन के कुल परिवारों 1244 में से 20 प्रतिषत परिवार का चुनाव उत्तरदाताओं के रूप में दैवनिदर्षन की लाटरी प्रविधि के माध्यम से किया गया है। अध्ययन हेतु कुल 250 परिवार का चयन किया गया हंै। अध्ययन हेतु तथ्यों का संकलन साक्षात्कार अनुसूची उपकरण के माध्यम से किया गया है अध्ययन से यह ज्ञात हुआ हंै कि नगर के अधिकांश एवं असामाजिक प्रवृत्ति के लोग प्रायः गंदी बस्तीयों में निवास करते हैं गंदे वातावरण में निवास करने के कारण लोगों की मनोवृत्ति अपराधी बन जाते हैं उनका नैतिक पतन हो जाता है बालअपराध, यौनअपराध, चोरी, नशाखोरी की इन क्षेत्रों में अधिकता पाई जाती है।

 

KEYWORDS: गंदी बस्ती नशीले पदार्थ, सेवन का स्वरूप, सेवन की आदत के लिये जिम्मेदार, महिलाओं द्वारा नशापान,

 

 


प्रस्तावना

विभिन्न शोध अध्ययनो एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वेक्षण से यह तथ्य उभरकर सामने आया है, कि गंदी बस्ती के सामाजिक पर्यावरण तथा भौतिक परिवेष का नकरात्मक प्रभाव महिलाओं पर पडता हंै। अन्तराष्ट्रीय रिर्पोट के अनुसार भारत मे पचास हजार से ज्यादा महिलाएं गदी बस्ती के परिवेष के चलते नषे के आदि बन गई है। जो कि धीरे धीरे बढते जा रहे हैं और हमारे समक्ष एक यक्ष प्रष्न बनकर खडा है।

 

गंदी बस्ति मे  विभिन्न सामाजिक आयोजन एवं उत्सवके अवसर पर पुरूष के साथ ही साथ महिलाआंे  में भी नषापान की प्रवृत्ति बढती जा रही है निष्कर्ष हमें विभिन्न रूप से देखने को मिलते हैनषे में विभिन्न गांजा, अफीम, भांगगोली, तथा मदिरा पान मुख्य रूप से लिया जाता है प्रभाव की चर्चा करे तो परिवारिक वाद विवाद, मारपीट, घरेलु हिंसा जैसी घटनाएं आए दिन इन क्षेत्रो में देखने को मिलती हंै।

 

छत्तीसगढ राज्य के प्रमुख शहरो के गंदी बस्तियों में उपरोक्त गतिविधियाॅ तेजी से बढ रही हैं ऐसे स्थिति में इस विषय पर गहन शोध अध्ययन नितांत आवष्यक प्रतीत होता हंै।

अध्ययन विषय का समाजशास्त्रीय महत्व -

गंदी बस्तियां नगर के समस्याग्रस्त क्षेत्रों के रूप में जानी जाती है, इसलिए इनको विषेष महत्व नहीं दिया जाता है।  इन बस्तियों के द्वारा निम्न आय वर्ग के लोगों में आवासीय समस्या का समाधान संभव होता है। नगरों से सम्पन्न होने वाले विभिन्न कार्यों के लिए आवष्यक सस्ते श्रमिकों की पूर्ति इन्हीं गंदी बस्तियों के निवासियों द्वारा ही संभव होती हैं। इन बस्तियों के वातावरण का प्रभाव स्त्रियों के विभिन्न पक्षों जैसे षिक्षा, सामाजिक स्तर, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य, जागरूकता पूरी स्तर, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य जागरूकता का प्रभाव पड़ता हंै।एक अनुमान के मुताबित दूनियां के गरीब आबादी में महिलाओं की जनसंख्या सबसे ज्यादा है। एवं निर्धनता के चलते वे तमाम तरह के सामाजिक आर्थिक एवं स्वास्थ्यगत समस्याओं का सामना करती हैं। प्रस्तावित अध्ययन के माध्यम से गंदी बस्तियों में महिलाओं की स्थिती को ज्ञात करने का प्रयास किया जाएगा जिससे उनकी समसामयिक स्थिती का ज्ञान होगा यह अध्ययन के महत्व को स्पष्ट करता हंै। इसी प्रकार 2011 की जनगणना के अनुसार गंदी बस्ती की जनसंख्या 6.54 करोड मंे से 5.41 प्रतिषत लोग निवास करते हंै।

 

उद्देष्य-

1.   अध्ययनगत उत्तरदाताओं की आर्थिक एवं पारिवारिेक समस्या को ज्ञात करना।

2.   गंदी बस्ती के सामाजिक एवं भौतिक परिवेष का महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को ज्ञात करना।

 

उत्तरदाताओं का चुनाव -

बिलासपुर नगर 48 वार्ड में विभक्त है अध्ययन हेतु अध्ययन क्षेत्र को 4 जोन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पष्चिम में विभक्त कर प्रत्येक जोन के कुल परिवारों 1244 में से 20 प्रतिषत परिवार का चुनाव उत्तरदाताओं के रूप में दैवनिदर्षन की लाटरी प्रविधि के माध्यम से किया गया है। अध्ययन हेतु कुल 250 परिवार का चयन किया गया हंै

 

तथ्य संकलन की प्रविधि एवं उपकरण -

अध्ययन हेतु तथ्यों का संकलन साक्षात्कार अनुसूची उपकरण के माध्यम से किया गया है

 

 

प्राप्त तथ्यों का विष्लेषण

परिवार के सदस्यों द्वारा नशीले पदार्थोंं का सेवन करना-

नषा एक ऐसी समाजिक बुराई हंै जिससे इंसान का जीवन समय से पहले ही मौत का षिकार बन जाता हंै। गंदी बस्ती मे रहने वाले परिवार अधिकंाष लोग नषे में लिप्त पाए जाते है। नषा करने वाला परिवार पूरी तरह से निर्दोष रहता है परंतु एक दूसरे के देखा देखी में नषा करना सीख जाता हंै। इस प्रकार गंदी बस्ती के कुछ सदस्य अपने परिवार के सदस्यों को देखकर ही नषा करते हंै। कभी-कभी परिवार के दो चार लोेग नषा करते हैं तो कुछ ही लोग नषा करेगेे यदि परिवार के सभी सदस्य नषा करेगे तो वहां पर नषा करने वाले लोगों की संख्या अधिक होगी।1डी. एट सालधनहा और डी.एस. गोयल 1992﴿2 का अध्ययन षराब पीने वाले व्यक्तियों की मनोदषा पर रहा है, निरंतर शराब का प्रयोग करते रहने से व्यक्ति बीमार अवस्था मे पहंुॅच जाता हैं जिससे उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पडता है।

 

 

नषीले पदार्थो के सेवन संबंधित उपरोक्त विष्लेषण से यह ज्ञात हुआ हंै कि सर्वाधिक 84.4 प्रतिषत परिवार के सदस्य नषीले पदार्थाे का उपयोग करते हंै,जबकि 15.6 प्रतिषत परिवार के सदस्य ऐसा नही करते हैं।

 

 

प्राप्त तथ्यों का विष्लेषण जोनवार करने से यह स्पष्ट हुआ हंै कि सर्वाधिक 94 प्रतिषत उत्तरदाता अरविंद नगर वार्ड के परिवार के सदस्य नषीले पदार्थाें के सेवन करने के पक्ष में हैं, जबकि सबसे कम 6 प्रतिषत परिवार के सदस्य नषीले पदार्थों का सेवन ना करने की बात करते हैं।अतः सर्वाधिक उत्तरदाता के परिवार के सदस्य नषीले पदार्थों का उपयोग करते हैं जिसका प्रमुख कारण नषे के प्रति उनकी जिज्ञासा उन्हे प्रेरित करती हेंै।

 

आरेख क्रंमाक 1

 

 ;षराबद्ध पीना या ना पीना हर व्यक्ति की अपनी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है।परंतु हमारे भारत देष मे नषा एक सामाजिक बुराई है क्योकि यह निर्भर करता है उस आदमी के विवेक पर जो ंसबवीवसपी रहा हैं और ऐसे में कुछ मानको को ध्यान रखा जाए तो हो सकता है ंसबवीवस चमतेवदंस 50: वजह बने। अतः नषे के लिए शाराब का ही प्रयोग नहीं किया जाता हंै वरन् अन्य वस्तुओं का भी प्रयोग किया जाता हैं जैसे-तम्बाकू, मद्यपान, सिगरेट, गुडाखु आदि का प्रयोग किया जाता है। यह एक चिंतनीय समस्या हंै विश्वस्वास्थ्य संगठन का एक अनुमान है कि शाराबियो की संख्या 140 मिलिन के आस पास है।3मृदुला शर्मा और मोलीचैधरी 2016﴿4का सर्वेक्षण 110 किषोरो पर रहा है जहाॅ 46.36किषोर मुख्य रूप से गुटखा, तम्बाखू, धूम्रपान, जैसे पदार्थो  का उपयोग करने के लिए भर्ती किए गए हंै, जिसमें से सर्वाधिक 5.88 किषोर गुटखा, 46.36 तम्बाखू, 37.27 धूम्रपान, और 13.63 षाराब, एवं शोष 8.18 अन्य पदार्थ का प्रयोग करते हंै।प्रस्तुत अध्ययन मंे उत्तरदाताओं से इस विषय मंे जानकारी एकत्रित की गयी हंै जिसे निम्न तालिका में प्रदर्षित किया गया हंै।

 

 

 

तालिका के विष्लेषण से यह ज्ञात हुआ हंेै कि सर्वाधिक 49.7 प्रतिषत परिवार के सदस्य मधपान का प्रयोग करते है, 24.2 प्रतिषत तम्बाखू, 13.4 प्रतिषत गुड़ाखु, 12.2 प्रतिषत सिगरेट का प्रयोग करते हैं।

 

जोनवार अध्ययन करने पर यह ज्ञात होता है कि जांेन क्रमांक 02 में सर्वाधिक उत्तरदाताओ ने मधपान करने की बात कही है, इसी प्रकार जोन क्रमांक 03 में उत्तरदाता तम्बाकू और सिगरेट, गुड़ाखू जैसी अन्य वस्तुओं का प्रयोग करते हंै, जिसमें से जोन क्र 01 और 04 की स्थिति भी सामान्य बनी हुई हंै।

 

निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि उत्तरदाता शराब के अतिरिक्त अन्य नषीले पदार्थों का भी सेवन करते हैं।

 

सेवन की आदत के लिए जिम्मेदार -

कोई भी दुव्र्यसन जो पहले जानने की इच्छा से तत्पष्चात् शौक से और उसके बाद निरन्तर सेवन से आदत बन जाए उसके लिए स्वयं को ही अधिक दोशी या जिम्मेदार समझे, यही बात सत्य या वास्तविक हंै।  सेवन की आदत के लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं, गंदी बस्ती में निवासरत् परिवार की महिलाएं अपने परिवार के कुछ सदस्यों द्वारा अपनायी जा रही हैं इस प्रवृत्ति को आत्मसात कर लेती हैं, तो कुछ अपने मित्रों के प्रभाव में आने पर इसका सेवन करते हैं।5गोरी डी. आर., सुमन एल. एन. और एस.एल. राव, पी.मूर्ति 2008﴿6के द्वारा अध्ययन शराब पीने वाले व्यक्तियो के रोग के विषय में रहा है, षराब का निरंतर प्रयोग करते रहने से व्यक्ति के स्मरण शक्ति का नाष होने लगता हैं जिससे उसकी याददाष में प्रभाव पडने लगता है।

 

 

सेवन की आदत के लिए जिम्मेदार संबंधित उपरोक्त तालिका के विष्लेषण से स्पष्ट  हुआ है कि सर्वाधिक 51.3 प्रतिषत उत्तरदाता सेवन की आदत के लिए जिम्मेदार स्वयं को समझते हैं, 19.3 प्रतिषत पडोसियों को, 16 प्रतिषत मित्रों एवं,13.8 प्रतिषत परिवार के सदस्यों को जिम्मेदार समझते हैं।तालिका को यदि जोन के आधार पर विष्लेषण करे तो जोन क्र. 03 के सर्वाधिक उत्तरदाता स्वयं को जिम्मेदार समझते है, जबकि जोन क्र. 01 में मित्र को मानते है, इसी प्रकार यदि जोन क्र. 03 की बात की जाए तो पड़ोसियों को समझते है, एवं जोन क्र. 04 के उत्तरदाताओं ने परिवार के सदस्यो को  जिम्मेदार समझा हंै।अतः यह स्पष्ट हो गया कि सेवन की आदत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति स्वयं को समझता हंै।

 

मोहल्ले में तनाव या लड़ाई झगड़े का होना-

गंदी बस्ती में रहने वाले लोगों का अपने पड़ोसियों से प्रायः टकराव या संघर्ष की स्थिति छोटी बातों पर ही अधिक होती हंै। बच्चों के आपसी झगड़े, पानी भरने को लेकर, गंदगी फैलाने के कारणों को लेकर, शराबी पड़ोसी द्वारा अपषब्दों का प्रयोग किये जाने को लेकर, मकान जमीन की वजह से, छुआछुत जैसी बातों को लेकर लोगों का अपने पड़ोसी से टकराव होते रहता हंै। सर्वाधिक संघर्ष बच्चों के आपसी झगड़ों की वजह से तथा पानी की वजह से होता हंै।

 

 

तालिका के उपरोक्त विष्लेषण के से यह ज्ञात हुआ हंैे कि सर्वाधिक 50.8 प्रतिषत उत्तरदाताओं के अनुसार मोहल्ले में तनाव या लडाई झगडे होते है, जबकि 49.2 प्रतिषत  उत्तरदाता के अनुसार मोहल्ले में लडाई झगडे का नही होना बतलाया हंै।यदि वार्ड के आधार पर विष्लेषण किया जाए तो सर्वाधिक 76.6 प्रतिषत शहीद रामप्रसाद बिसमिल वार्ड के उत्तरदाताओं ने मोहल्ले में तनाव लडा़ई झगडे होने की बात कही है, एवं सबसे कम त्रिपुर सुंदरी फोकटपारा में 41.6 प्रतिषत लड़ाई झगड़े वार्ड में नहीं होनें कें पक्ष मे उत्तरदाताओं ने बतलाया हैं। सर्वाधिक उत्तरदाताओं ने मोहल्ले में तनाव एवं लड़ाई झगड़े की बातों को स्वीकार किया हैं इस प्रकार यह कहा जा सकता हेेैं कि मोहल्ले में तनाव एवं लड़ाई झगड़े का मुख्य कारण अज्ञानता हैं।

व्यक्ति से मारपीट अथवा गाली-गलौज का होना-

गंदी बस्ती में निवासरत् लोग प्रायः अषिक्षित होते हैं ये दूर दर्षिता समझदारी से काम नहीं लेते हैं, छोटी-छोटी बातों को संघर्ष का विषय बना लेते हैं, बहुत ही मामूली सी बातों पर विवाद होते रहता हैं।गंदी बस्तियों में सर्वाधिक बच्चों के कारण एवं पानी के कारण तथा शराबियों के विवाद होते रहता हंै। विवाद के दौरान बात बढ़ जाता हंै गाली-गलौज पर उतर आते हैं कुछ लोग मारपीट पर भी उतर जातेहैं।

 

 

व्यक्ति से मारपीट अथवा गाली गलौेज का होना संबध संबंधित विष्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 61.2 प्रतिषत उत्तरदाता मारपीट एवं गाली-गालौेज करते है, जबकि 38.8 प्रतिषत उत्तरदाता मारपीट एवं गाली-गलौज नहीं करते हैं। प्राप्त तथ्यों को यदि जोन के आधार पर विष्लेषण करे तो यह स्पष्ट होता है कि जोन क्र. 01 में सर्वाधिक उत्तरदाताओं नेव्यक्ति से मारपीट एवं गाली गलौज होने की बातो को स्वीकार किया है, जबकि जोन क्र. 04 के उत्तरदाताओं ने इस विषय मंे जानकारी ना होने कीे बात कही है। अतःमहिला उत्तरदाताओं ने यह स्वीकार किया हंै कि मात्र गाली-गलौज होेने का प्रमुख कारण मामूली वाद विवाद का होना हंै।

 

 

 

 

वार्ड में महिलाओं द्वारा नशापान करना-

समाज कि यह धारणा है कि नषा करना केवल पुरूषो का काम हंै परतु आज महिलाएं भी इस तरह का करतुत करती हैं तो उन्हे कुल विरोधी या कुल का नाष करने वाला माना जाते है एक नए शोध से यह पता चला है कि महिलाएं भी सिगरेट, शराब, तम्बाखूका प्रयोग करती हंै। नषा ले रहे व्यक्ति की स्थिति समाज में लचार रहती है। चाहे पुरूष हो या महिला बाहर के ही नही परिवार के लोग भी उसे हेय कि दृष्टि से देखते हैं जिसकी वजह से उनमे नषा के प्रति रूझान और समाज से दूरियां बढ जाती हैं।7एस. दास चैधरी और बी. एस. के.उकिल 2006﴿8 ने अपने अध्ययन में 100 शराब पिने वाले व्यक्ति के विषय पर रहा हंै उत्तरदाताओं के अनुसार काफी उच्च मात्रा में निरंतर शराब के सेवन से व्यक्ति को तनाव पूर्ण जीवन से मुक्ति की प्राप्ति होती हंै।

 

 

प्राप्त तथ्यों के विष्लेषण से यह स्पष्ट हुआ हंै कि सर्वाधिक 66.8 प्रतिषत वार्ड में महिलाओं द्वारा नषा-पान करना बतलाया गया है, जबकि 33.2 प्रतिषत महिलाओं ने नषापान का ना करना बताया हंै। उपरोक्त तथ्यों को वार्ड में महिलाओं द्वारा नषापान करने संबंधी अध्ययन को यदि जोन क्र. के आधार पर ज्ञात करने से यह स्पष्ट है कि जोन क्र. 01 के अरविद नगर वार्ड में 95.8 प्रतिषत उत्तदाताओं ने वार्ड की महिलाएं नषापान करने के पक्ष में है, जबकि जोन क्र. 04 के मिनी बस्ती के उत्तदाताओ ने नषापान करने की बातों को स्वीकारा है, इसी प्रकार जोन क्र. 02 की बात की जाए तो यहाँ उत्तरदाताओं ने कभी कभार नषापान करने की बात कही है, जबकि जोन क्र. 03 के उत्तरदाताओं ने भी इन्ही बातो को स्वीेेेकृति दी है।

अतः यह स्पष्ट है कि  अधिकांष  वार्ड मंे रहने वाली  महिलाएं नषा पान करती हंै एवं वह निरंतर नषापान करना सही समझती हंै।

 

 

निष्कर्ष -

उपरोक्त तालिकाओं के आधार पर हमें यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ है कि सर्वाधिक उत्तरदाताओं के परिवार के सदस्य किसी किसी प्रकार के नषे की प्रवृत्ति से लिप्त पाये गये हैं, जिसमें सर्वाधिक सदस्यों का रूझान मद्यपान की ओर पाया गया है, तथा इस नषे की प्रवृत्ति की आदत के लिये अधिकतर सदस्य स्वयं को ही जिम्मेदार मानते हैं तथा कुछ सदस्यों का मानना है कि परिवार के वातावरण अर्थात् जिस माहौल में वह निवास करते हैं उसका भी बहुत हद तक नषा करने की ओर झुकाव था। निष्कर्ष में यह भी पाया गया कि नषे में लिप्त रहने के कारण मोहल्ले में लडाई झगडें तथा गाली गलौज का स्थिति निर्मित होना साधारण हो गया है।

 

अध्ययन में विषेषतः महिलाओं के द्वारा नषा करने की प्रवृत्ति में यह पाया गया कि अधिकांष महिलाएं 66.8 प्रतिषत नषापान से लिप्त है तथा इसे सही समझती है और निरंतर करने की इच्छुक भी हैं।

 

 

REFERENCE

1.        https://m.bhaskar.com.pokhran. Jan.16.1.2017.

2.        Saldanha D, Goel DS.(1992) : Alcohal and tha Soldier.indian J Psychiatry.34:351-8

3.        https:astivtva53.wordpress.com .nasha ek burai.

4.        Mridula Sharma,moni chaoudhari  : Astudy of Drugs and substance, The internastional journal of indian psychology issn 2348-5396(e) issn;2349-3429(p) volume 3,issue 4,no 58,Dip; 18.01.041/2016 ISBN;978-1-24976-1 https;//www.ijip,in july September,2016.

5.        https://hi.m.wikipedia. Org. nashli dawa.

6.        Siri Gowri DR, Suman LN,Rao SL,Murthy p.(2008).A studyof executive functions in alcohol   dependent individuals: Association of age, education and duration of drinking indian j clin psychology.35:14-23.

7.        www.achhikhbar.com/2017/02/24/alcohal-addiction-symtoms-tritment-in hindi.

8.        Chaudhury S, Das SK,Ukil B. (2006).Psychological assessment of  alcoholismin mail. Indian j psychiatry, 34:34 -5

 

 

 

 

 

Received on 24.04.2019            Modified on 19.05.2019

Accepted on 01.06.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):431-436.