अनुसूचित जनजाति चिकित्सिा सुविधाएँ- डिण्डौरी जिले के विषेष संन्दर्भ में

 

भावना अभिषेक प्रधान

षोध छात्रा अर्थषास्त्र, रानी दुर्गावती विष्वविद्यालय जबलपुर.प्र.﴿

 

मध्य प्रदेष आज तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक है, जो भौगोलिक रूप से भारत के केन्द्र में स्थित होने के कारण ‘‘हृदय राज्य‘‘ है वहीं भारत देष की कुल अनुसूचित जनजाति जनसंख्या का लगभग 25 प्रतिषत जनसंख्या को साथ लिये हुए चल रहा है। आर्थिक नजरिये से देखा जाए तो यही जनसंख्या ’’मानव संसाधन‘‘ में परिणित होती है क्षेत्र विषेष का विकास होता है मानव संसाधन की गुणवत्ता में सुधार किया जाना अति आवष्यक है और षिक्षा स्वास्थ्य इसी आयाम के दो पहलू हैं। शोध पत्र के माध्यम से यह अध्ययन इसी तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है कि जहाॅ एक ओर ’’विकास‘‘ हमारा मुख्य ध्येय तो वहीं दूसरी ओर यह देखना भी आवष्यक है कि अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में विकास की गति कैसी है विकास के विभिन्न सूचकों में एक - स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति आवष्यकता के अनुरूप कैसी है।

 

 अनुसूचित जनजाति, स्वास्थ्य सुविधा।

 

 

 

प्रस्तावना:

डिण्डौरी जिला मध्य प्रदेष के पूर्वी भाग में छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से लगा हुआ है यह मैकाल पर्वत माला पर स्थित है। यह जिला मध्य प्रदेष में अपनी विषेष बातों के कारण भिन्न है डिण्डौरी में जीवन रेखा नदी- नर्मदा का तट है, प्राकृतिक झरने, नेवसा फाॅल, दगोना फाॅल तो वहीं बिना किसी पाबंदी के कृष्ण मृग भी कारोपानी में अपने प्राकृतिक आवास में रहते हैं, साथ ही प्राचीन कालीन स्थापत्य कला कुकर्रामठ या ऋणेष्वर मंदिर, है जो अपने आप में अनुपम कृति है।

 

यहाँ विभिन्न प्रकार की अनुसूचित जनजातियाॅ अपनी मूल परंपरा को संजोय हुए जीवन यापन कर रही हैं और इनके बीचबैगाजनजाति का नाम लेना आवष्यक है क्योंकि यह जनजाति आज भी अपने मूल रूप मेंबैगा चकमें निवास करती है, इसे ‘‘विषेष पिछड़ी जनजाति’’ का दर्जा प्राप्त है और राज्य के विकास की मुख्य धारा में इन्हें जोड़ना हमारी प्राथमिकता पहले भी थी और वर्तमान में भी है।

 

बैगा जनजातिः-

बैगा द्रविड़ वर्ग की जनजाति है जिसे अत्यंत पिछड़ी जनजाति घोषित किया जाता किया जाता है इसे धरती पुत्र या बिछवार कहकर संबोधित किया जाता है।

भौगोलिक वितरण:

बैगा जनजाति मध्य प्रदेष के पूर्वी सतपुड़ा डिण्डौरी, मण्डला, बालाघाट तथा सीधी जिलो में निवास करती है।

 

शारीरिक विशेषताएँ:

बैगा जनजाति के लोगांे का कद मध्यम उॅचा, शरीर सुगठित, नाक चपटी, रंग काला एवं बाल सीधे होते हैं।

 

निवास:-

बैगा जनजाति के लोग घने जंगलो के दुर्गम क्षेत्रों में निवास करते है, इनके घर बाॅस और मिटटी के बने होते हैं, जिनकी छत घास और पत्तियों की बनी होती है। ये लोग अन्य जनजातियों के गांव में निवास नहीं करते वरन अन्य स्थान पर अपने परिवार के साथ रहते हैं। इनका पहनावा विषिष्ट होता हैबैगा पुरुष कमर के नीचे एक वस्त्र और सिर पर कपड़े का टुकडा बांधते हैं, जबकि स्त्रियाॅ धोती पहनती हंै, स्त्रियों में आभूषणांे एवं गोदना का अत्याधिक प्रचलन होता है, गुदना शारीरिक साज-सज्जा का मुख्य साधन माना जाता है डाॅ. एल्विन ने बैगाआंे को अत्यंत हंसमुख और विषिष्ट समूह के रूप में वर्णित किया है।

 

सामाजिक व्यवस्था:-

बैगा समाज पित्र संचालक समाज है और अनेक शाखाआंे में विभक्त होते हैं। विवाह के पष्चात नव विवाहित वर वधु की प्रायः संयुक्त परिवार से अलग एकल परिवार में रहने की प्रथा प्रचलित है। इनमे गोत्र प्रथा प्रचलित है और संगोत्री विवाह नहीं होता। विवाह मान्य है लेकिन विधवा को अपने देवर से विवाह करना होता है तलाक के लिये पति-पत्नि दोनों को स्वतंत्रता प्राप्त होती , दोनों का एक साथ एक तिनका तोड़ना तलाक का सूचक माना जाता है, बैगा जनजाति में पंचायती व्यवस्था प्रचलित है।

 

बैगा जनजाति के लोग घने जंगलो के दुर्गम क्षेत्रों में निवास करते है चूॅकि ये क्षेत्र स्वयं में दुर्गम है सड़कों आधारभूत संरचना का विकास किया जाना अभी बाकी है या यह कहा जा सकता है कि आवष्यकता के अनुरूप आधारभूत संरचना का विकास किया जाना अभी बाकी है। इसी सुविधा में एक है ‘‘स्वास्थ्य सुविधा’’- स्वास्थ्य हर व्यक्ति की पहली प्राथमिकता है क्योंकिस्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मस्तिष्क का वास होता है। स्वस्थ्य शरीर की कार्यक्षमता, विवेक अस्वस्थ्य व्यक्ति की तुलना में कैसी होती है इससे हम सभी भली भंाति परिचित हैं। समाज तभी तीव्र गति से विकास करता है, जब समाज का व्यक्ति स्वस्थ्य होगा, स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होगा और यह तभी संभव हो पाएगा जब स्वास्थ्य सुविधाएॅ भी आसानी से उपलब्ध होंगे। सरकार इस ओर प्रयास कर रही है इस क्षेत्र के स्वास्थ्य की स्थिति का अध्ययन इस प्रकार है।  

 

अध्ययन का महत्वः-

मध्य प्रदेष का डिण्डौरी जिला आज भी अल्पविकसित जिले में आता है, यहाॅ विभिन्न प्रकार की अनुसूचित जनजातियाॅ अपनी मूल परंपरा को संजोय हुए जीवन यापन कर रही हैं और इनके बीचबैगाजनजाति का नाम लेना आवष्यक है क्योंकि यह जनजाति आज भी अपने मूल रूप मेंबैगा चकनिवास करती है इसेविषेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा प्राप्त है और राज्य के विकास की मुख्य धारा में इन्हें जोड़ना हमारी प्राथमिकता पहले भी थी और वर्तमान में है।

 

अध्ययन का उद्देष्यः-

1        अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का अध्ययन करना

2        स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति ज्ञात करना

 

साहित्य का अवलोकनः-

आर. के ठकराल , सफीक रहमान 20181 डिण्डौरी जिला 25 मई 1998 को गठित हुआ है जिले की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, सन 2006 पंचायती राज मंत्रालय ने भारत के अत्यंत पिछड़े 250 जिलों में इसे शामिल किया था तब से बी आर जी एफ के तहत यह जिला विषेष निघि प्राप्त कर रहा है। वर्ष 2012-13 में चालू कीमत पर जिले की सकल घरेलू उत्पाद 1,79,356 लाख थी। 2011 की जनगणना के अनुसार साक्षरता दर 63.9 प्रतिषत है।

 

सी सी एस एस हेल्थ इनटरनेषनल मार्च 20162 की रिपोर्ट के तहत, यह अध्ययन मध्य प्रदेष के 2 जिलों पन्ना एवं सतना पर केंद्रित है जहाॅ छुआछूत, बच्चों में बालक को अधिक महत्व दिया जाना, सामाजिक बुराइयों में सबसे बड़ी सामाजिक बुराई है, परिणामस्वरूप मातृत्व स्वास्थ्य लिंगानुपात प्रभावित होता है। यह अध्ययन प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित है मध्य प्रदेष की स्वास्थ्य सुविधाओं की खराब स्थिति को बताता है।

 

एन एफ एच एस -4 2015 -163 की रिपोर्ट के अनुसार डिण्डौरी जिला ग्रामीण जनसंख्या बाहुल्य जिला है 70 प्रतिषत से अधिक जनसंख्या गाॅवों में निवास करती है, लिंगानुपात 1004 ग्रामीण क्षेत्र में 1012 है, महिला साक्षरता 50.7 प्रतिषत ग्रामीण क्षेत्र में 49.5 प्रतिषत, संस्थागत प्रसव का प्रतिषत 55.8 प्रतिषत ग्रामीण क्षेत्र में 55.7 प्रतिषत है।

 

मीता चैधरी, एच. के. अमर नाथ, प्रीतम दत्ता 20114 केन्द्र सरकार की स्वास्थ्य स्ुविधाओं पर व्यय का अध्ययन किया है इसके आधार पर कहा जा सकता है कि वर्ष 2000 एवं 2009 की अवधि के मध्य केन्द्र सरकार का स्वास्थ्य सुविधाओं पर व्यय 15 से 30 प्रतिषत बढ़ा है। केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को विभिन्न योजनाओं के तहत धनराषि व्यय करती है। स्वास्थ्य स्ुविधाओं पर व्यय का प्रतिषत उत्तर प्रदेष, महाराष्ट्र, असम, पष्चिम बंगाल, और आंध्रप्रदेष में अधिक है साथ ही विभिन्न राज्यों के मध्य प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य व्यय की कोई निष्चित प्रवृति भी दिखाई नहीं देती।

 

जनगणना 20115  की रिपोर्ट के अनुसार डिण्डौरी जिले में मुख्यतया कृषि की जाती है 45.77 प्रतिषत जनसंख्या कृषि पर आश्रित हैं धान गेहूॅ मुख्य फसलें हैं, कुल भूमि का लगभग 23.76 प्रतिषत भूभाग वनों से आच्छादित है, जल संसाधन की कमी है, यहाॅ मध्यम बड़े उद्योगों का अभाव है, जिले का कोई भी भाग रेल लाइन से नहीं जुड़ा , साथ ही बिजली का उत्पादन भी नहीं किया जाता।

 

रोगली (2002)6 के शोध पत्र में प्रवासित व्यक्तियों के स्वास्थ्य का अध्ययन है, और यह बताया कि प्रवासित व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण, ये घर और बाहर दोनों स्थानों में प्रभावित होते हैं यह अध्ययन प्रवासित श्रमिकों पर किया गया है।

 

 

सलिल बासू (2000)7 इन्होंने अपने शोधपत्र में जनजातियों के स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न पहलुओ का अध्ययन किया है। इनके अनुसार अनुसूचित जनजाति सामाजिक स्तर, सांस्कृतिक स्तर आर्थिक विकास के आधार पर भिन्न हैं। जनजातियों की अपनी अलग अलग क्षेत्र के अनुसार सांस्कृतिक विषेषताएं हैं। भारतीय जनजातियाॅ विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता हैं इनकी आर्थिक गतिविधियाॅ प्रकृति पर आधारित होती हैं।

 

डी. एम. मजूमदार (1944)8 ने अपना मत प्रकट किया है कि जनजातियों की सांस्कृतिक पहचान को उनके मूल रूप में बनाए रखने के लिये प्रयास करना चाहिये। उनका मानना है कि हम उनके एकांकीपन को बाधित करते हैं। जनजातियों की विशिष्टता को बनाए रखने के लिये सामाजिक विकास के सभी तत्वों को उनके क्षेत्रों में जाने से रोकना साथ ही जनजातीय जीवन से संबंधित तत्वों को ही केवल जाने की अनुमति देनी चाहिये। ताकि शहरी जीवन के अवगुणों को दूर रखा जा सके।

 

ब्रिटिश काल के दौरान मानव जाति के सुव्यवस्थित ढंग से अघ्ययन के लिये वेरियर एलविन (1943)9 ने एक नए सिद्धान्त का प्रतिपादन किया और बताया कि जनजातीय समाज के लोग स्वयं को जंगलों और वनीय इलाकों में तटस्थ रखते हैं इनका यह सिद्धान्त सामाजिक मानवशास्त्र के तहत ष्च्नइसपब च्ंता ज्ीमवतलष् के नाम से जाना जाता है। इन्होंने अपने सिद्धान्त में बताया कि जनजातीय समाज से भिन्न व्यक्ति या सामान्य मानव को उनके निवास स्थान पर राज्य सरकार की अनुमति के बिना प्रवेश निषेध है, यह इनकी तटस्थता की पुष्टि करता है।

 

शोध प्रविधिः

अध्ययन क्षेत्रः

इस अध्ययन में मध्य प्रदेष के सम्पूर्ण जिले डिण्डौरी को शामिल किया गया है इसमें 3 विकासखण्ड ऐसे हैं जिनमें बैगा जनजाति की जनसंख्या अधिक है और बैगा चक क्षेत्र शामिल है को चुना गया है ये हैं बजाग, समनापुर करंजिया विकासखण्ड को लिया गया है।

 

 

अध्ययन क्षेत्रः- मध्य प्रदेष का अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिला डिण्डौरी

 

 

न्यादर्ष का चयनः

स्तरीकृत न्यादर्ष विधि ेजतंजपपिमक ेंउचसपदह का चयन किया गया है।

 

आंकड़ों का चयनः

यह अध्ययन द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है इसमें सम्पूर्ण जिले डिण्डौरी को शामिल किया गया है।

 

चिकित्सा सुविधाएंः-

डिण्डौरी जिले के बजाग, करंजिया समनापुर विकासखण्ड का चुनाव बैगा जनजाति की बाहुल्यता के कारण किया गया है, चूॅकि ये क्षेत्र स्वयं में दुर्गम है सड़कों आधारभूत संरचना का विकास किया जाना अभी बाकी हैै। षिक्षा, सड़क, बिजली जैसी अनेक आधारभूत संरचना का विकास करना आवष्यक है, इसी सुविधा में एक हैस्वास्थ्य सुविधा’- स्वास्थ्य हर व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिये आवष्यक है क्योंकिस्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मस्तिष्क का वास होता है। स्वस्थ्य शरीर की कार्यक्षमता, विवेक अस्वस्थ्य व्यक्ति की तुलना में कहीं अधिक बेहतर है इससे हम भली भंाति परिचित हैं। समाज तभी तीव्र गति से विकास करता है जब समाज का व्यक्ति स्वस्थ्य होगा, स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होगा और यह तभी संभव हो पाएगा जब स्वास्थ्य सुविधाएँ भी आसानी से उपलब्ध होंगे। सरकार इस ओर प्रयास कर रही है इस क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन इस प्रकार है।  

1.       डिण्डौरी जिले में 2012-13, 01 औषधालय, 07 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 162 उप स्वास्थ्य केन्द्र थे वर्ष 2012-13 से लेकर 2015-16 तक चिकित्सा सुविधाओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। 

2.       केवल डिण्डौरी जिले में 01 एलोपैथिक चिकित्सालय / औषधालय है आयुर्वेदिक/ होम्योपैथिक/ यूनानी औषधालय डिण्डौरी में 09, बजाग में 01,शहपुरा 02 हैं, जिले में सबसे अधिक शैय्याओं की सुविधा 210 डिण्डौरी जिले में है।

3.       निम्न तालिका से डिण्डौरी जिले की वार्षिक (2012-2016) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की वास्तविक स्थिति ज्ञात होती है।

 

 

निष्कर्षः-

       चिकित्सा सुविधाएॅ 2012-13 से 2015-16 में किसी प्रकार का परिवर्तित दिखाई नहीं देता। डिण्डौरी जिले की जनसंख्या 2011 के अनुसार 7,04,524 है और इनके लिये कुल उपलब्ध शैय्याएॅ 1317 वर्ष 2015 -16 के अनुसार जो काफी कम है।

       चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की संख्या में कमी आयी है नर्स स्टाफ की संख्या 60 से घटकर 10 हो गई है कुल 123 चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में काफी कम है।

       स्थान विषेष के आधार पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में काफी कम है यह स्थिति गंभीर है क्यांेकि यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है परिणामतया कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है मानव संसाधन के विकास हेतु स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास विस्तार किया जाना हमारी पहली प्राथमिकतमा होनी चाहिये।

 

संदर्भ सूचीः

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2ण्     ।ब्ब्म्ैै भ्मंसजी प्दजमतदंजपवदंस डंकीलं च्तंकमेी भ्मंसजी ैलेजमउे ।ेेमेेउमदज त्मचवतज भ्मंसजी ैनचचवतजपदह च्तवहतंउ छवअमउइमत 2014. व्बजवइमत2015  च्तमचंतमक थ्वत ज्ीम क्मचंतजउमदज थ्वत प्दजमतदंजपवदंस क्मअमसवचउमदज ।ब्ब्म्ैै भ्मंसजी प्दकपं डंतबी 2016 ।ब्ब्म्ैै भ्मंसजी प्दजमतदंजपवदंसए प्दबण् 1016 थ्पजिी ।अमदनमए ैनपजम 11।ध्ब् छमू ल्वताए छमू ल्वता 10028 न्दपजमक ैजंजमे

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8ण्     डंरनउकंतए क्ण्छण् श्त्ंबमे ंदक ब्नसजनतमे वसिदकपंए ।ेपं च्नइसपेीपदहश्ण् ।ेपं च्नइसपेीपदह भ्वनेम क्मसीपण् ;1944द्धए

9ण्     टमततपमतए म्सूपदए श्ज्ीम ।इवतहपदंसेश्ए व्गवितक न्दपअमतेपजल च्तमेेए छमू क्मसीपण् ;1943द्ध

 

 

 

 

 

Received on 20.04.2019            Modified on 10.05.2019

Accepted on 27.05.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):555-559.