हमीरपुर जनपद (उ0 प्र0) में जनसंख्या वृद्धि एवं वितरण प्रतिरूप
मधुर यादव1,’ डाॅ. आर.जी. कुषवाहा2
1षोधार्थी, भूगोल विभाग, बुन्देलखण्ड विष्वविद्यालय, झाँसी (उत्तर प्रदेष
2एसोसिएट प्रोफेसर, भूगोल विभागाध्यक्ष, अतर्रा.पी.जी. काॅलेज, बाँदा (उत्तर प्रदेष
*Corresponding Author E-mail: madhuryadav908@gmail.com
ABSTRACT:
जनसंख्या वितरण एवं जनसंख्या घनत्व दो परस्पर सम्बन्धित लेकिन भिन्न संकल्पनाएँ हैं। जनसंख्या वितरण मेें क्षेत्रीय प्रतिरूप को दर्षाया जाता है तथा दूसरे का सम्बंध जनसंख्या आकार तथा क्षेत्रफल से होता है। जनसंख्या वृद्धि का तात्पर्य एक क्षेत्र विषेष में किसी समय निवास कर रहे लोगों की संख्या में परिवर्तन से है। शोध अध्ययन क्षेत्र जनपद हमीरपुर उत्तर प्रदेष राज्य के दक्षिण स्थित चित्रकूट मण्डल का प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं वाला महत्वपूर्ण जनपद है। ये भू-भाग दक्षिणी पठारी भाग तथा यमुना नदी के मध्य स्थित है। हमीरपुर जनपद की जनसंख्या वृद्धि एवं वितरण प्रतिरूप का जनगणना दषक वर्ष 2001 एवं 2011 को बनाया गया है जिसके आधार पर जनपद के 7 विकासखण्डों को इकाई मानकर कालिक एवं स्थानिक विष्लेषण किया गया है
KEYWORDS: जनसंख्या वृद्धि, जनसंख्या वितरण, जनसंख्या घनत्व, जनगणना दषक, कालिक एवं स्थानिक विश्लेषण।
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एक निष्चित भू-भाग में मानव समूह, जो किसी राजनीतिक एवं सामाजिक नियमों के अनुसार सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं वह जनसंख्या कहलाती है। जनसंख्या भौगोलिक अध्ययन का केन्द्र बिन्दु है जो स्वयं का आर्थिक संसाधन हैं किसी भी देष के सामाजिक-आर्थिक विकास के विभिन्न चरणों का संरचनात्मक स्वरूप कार्यरत जनसंख्या द्वारा ही निर्धारित होता है। जनसंख्या भूगोलविदों में अग्रणी जी.टी. ट्रिवार्था ने जनसंख्या वितरण एवं जनसंख्या को भूतल वितरण में पायी जाने वाली क्षेत्रीय भिन्नता के अध्ययन का विषय माना है। जनसंख्या वितरण एवं जनसंख्या घनत्व दो परस्पर सम्बन्धित लेकिन भिन्न संकल्पानाएँ हैं। जनसंख्या वितरण में अधिक बल स्थितिगत एवं जनसंख्या घनत्व में आनुपातिक सम्बंध पर दिया जाता है। पहले वाला क्षेत्रीय प्रारूप की ओर इषारा करता है- जिसमें जनसंख्या वितरण प्रारूप रेखीय तथा जमघट आदि हो सकता है। दूसरे का संम्बंध जनसंख्या आकार एवं क्षेत्रफल सेे होता है। इसमें मनुष्य एवं क्षेत्र के आनुपातिक सम्बंध पर जोर दिया जाता है। अर्थात् जब हम जनसंख्या वितरण का अध्ययन करते हैं तो अधिक जोर जनसंख्या वितरण के प्रारूप पर देते हैं और जब जनसंख्या घनत्व का अध्ययन हो, तो हमारा अधिक ध्यान किसी प्रकार के मनुष्य क्षेत्र अनुपात सम्बंध निर्धारित करने की ओर रहता है। जनसंख्या वृद्धि का अर्थ अधिकतर एक क्षेत्र विषेष में किसी समय रह रहे लोगों की संख्या में परिवर्तन से है। यह परिवर्तन नकारात्मक भी हो सकता है और सकारात्मक भी। ऐसे परिवर्तन को कुल संख्या में परिवर्तन और प्रतिषत परिवर्तन को दोनों तरह से मापा जा सकता है। जनसंख्या परिवर्तन का अध्ययन 10 वर्षों के लिए किया जाता है। यह समय साधारणतया दो जनगणना के बीच का समय है। जनसंख्या वृद्धि किसी क्षेत्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक उत्थान, ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि तथा राजनैतिक आदर्ष का एक महत्वपूर्ण सूचक है।
अध्ययन क्षेत्र-
शोध अध्ययन क्षेत्र जनपद हमीरपुर उत्तर प्रदेष राज्य के चित्रकूट मण्डल का एक प्रमुख भाग है। हमीरपुर जनपद का नाम इसके संस्थापक राजा हमीरदेव के नाम पर रखा गया है जो कलचुरी राजपूत थे और 11वीं शताब्दी में अलवर (राजस्थान) से हमीरपुर आये थे। 1823 में हमीरपुर उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अलग और स्वतंत्र जनपद के रूप में सामने आया 11 फरवरी 1995 को हमीरपुर जनपद को दो भागों में विभाजित करके नवीन जनपद महोबा बनाया गया। हमीरपुर जनपद का भौगोलिक क्षेत्रफल 4,021 किमी.2 है, जो उत्तर प्रदेष राज्य में क्षेत्रफल की दृष्टि से 25वें स्थान पर तथा भारत देष में यह 297वें स्थान पर है। इसके उत्तर में जालौन तथा कानपुर जनपद दक्षिण में महोबा जनपद पूर्व तथा पष्चिम में क्रमषः बाँदा तथा झांसी जनपद की सीमा स्पर्ष करती है। जनपद की भौगोलिक अवस्थिति 25॰30’ उत्तरी अक्षांष से 26॰8’ उत्तरी अक्षंाष तथा 79ह्22’ पूर्वी देषांतर से 80ह्21’ पूर्वी देषांतर के मध्य है।
प्रशासनिक दृष्टि से जनपद हमीरपुर का विभाजन 4 तहसील (हमीरपुर, मुस्कुरा, राठ, मौदहा, सरीला) 7 विकासखण्ड (कुरारा, हमीरपुर, मौदहा, राठ), 4 नगर पंचायत (कुरारा, सुमेरपुर, गोहाण्ड, सरीला) तथा 627 गाँव में किया गया है। हमीरपुर जनपद का प्रषासनिक मुख्यालय हमीरपुर नगर में स्थित है। 2011 की अंतिम जनगणना रिपोर्ट के अनुसार जनपद की जनसंख्या 11 लाख 4 हजार 285 है, जनसंख्या की दृष्टि से जनपद का उत्तर प्रदेष में 69 वां स्थान तथा भारत देष में 417 वां स्थान है। पुरुष तथा महिला जनसंख्या क्रमषः 5 लाख 93 हजार 537 तथा 5 लाख 10 हजार 748 है। 2001 से 2011 के मध्य दषकीय जनसंख्या वृद्धि दर 12.9ः थी जो उत्तर प्रदेष राज्य की औसत दषकीय वृद्धि दर 20.22ः से कम है। जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा विकासखण्ड मौदहा है तथा सबसे छोटा राठ विकासखण्ड है। इसी प्रकार जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से सबसे बड़ा सरीला तथा सबसे छोटा कुरारा विकासखण्ड है।
उद्देष्य-
जनपद में जनसंख्या वृद्धि तथा वितरण घनत्व का अध्ययन करना ताकि इस अध्ययन के माध्यम से योजनाकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता प्रषासक एव व्यक्ति जो क्षेत्र की विकास योजना में संलग्न हैं लाभान्वित होकर क्षेत्र के विकास के लिए उचित योजना बना सके।
विधि तंत्र-
यह शोधपत्र विकासखण्ड को इकाई मानकर किया गया है, जिसमें जनपद हमीरपुर के 7 विकासखण्डों के आंकड़े द्वितीयक रूप संग्रहीत किये गये हैं। आंकड़ों के एकत्रीकरण हेतु आधार वर्ष 2001 तथा 2011 को माना गया है। यह शोध पत्र मुख्यतः द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है। द्वितीयक आंकड़ों की प्राप्ति दैनिक, साप्ताहिक, मासिक पत्रिका, जनपद जनगणना हस्त-पुस्तिका, संाख्यिकी पुस्तिका तथा जनपद गजेटियर से होगी। इन आंकड़ों को एम.एस. एक्सेल, एम.एस. वर्ड साॅफ्टवेयर के माध्यम से तालिकाबद्ध तथा विष्लेषित किया जाएगा। सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग करके आँकड़ों का विष्लेषण किया जायेगा तथा मानचित्र आरेखांे का प्रयोग किया जायेगा।
जनसंख्या वृद्धि का कालिक एवं स्थानिक विष्लेषण-
जनपद हमीरपुर में जनसंख्या वृद्धि के कालिक विष्लेषण के अन्तर्गत जनपद में होने वाली दषकीय वृद्धि दर कालिक प्रतिरूप का विष्लषण किया गया इसके बाद विकासखण्ड स्तर पर जनसंख्या वृद्धि का स्थानिक विष्लषण प्रस्तुत किया गया है।
कालिक विष्लेषण-
जनपद हमीरपुर में सन् 1901 से 1921 तक जनसंख्या की वृद्धि मंद रही जिसका प्रमुख कारण पर्याप्त जनस्वास्थ्य सम्बंधी सेवाएँ सुलभता से प्राप्त न होना था। 1921 के बाद जनसंख्या के विकास में वृद्धि दर्ज की गयी। 1921-1931 के मध्य की अवधि में 6.8ः जनसंख्या वृद्धि अंकित की गयी। इस वृद्धि का एक कारण जनसंख्या स्थानांतरण भी था। 1931-1941 के मध्य 13.8ः जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गयी। इस वृद्धि के प्रमुख उत्तरदायी कारकों में चिकित्सीय सेवा केंद्रो, मातृ एवं षिषु संरक्षण की स्थापना, यातायात के याधनों में उत्तरोत्तर वृद्धि तथा फसलोत्पादन में वृद्धि आदि था। 1941-1951 के मध्य में ऋणात्मक 37.0ः जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गयी इस अवधि में अल्प-वृद्धि के आधारभूत कारणों में जहाँ एक ओर द्वितीय विष्वयुद्ध के कारण राजनैतिक अस्थिरता एवं व्यवधान रहे, वहीं दूसरी ओर यमुना एवं बेतवा तथा इनकी सहायक नदियों में आयी व्यापक बाढ़ थी।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1951-1961 के दशक में जनसंख्या की वृद्धि 23.1ः थी जिसका कारण शान्ति स्थापना, हरित क्रान्ति के करण फसलोत्पादन में वृद्धि, कृषि उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई तथा स्वास्थ्य सम्बंधी सेवाओं का बेहतर एवं प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन तथा परिवहन एवं संचार साधनों में वृद्धि थे। 1961-1971 के मध्य दषकीय वृद्धि की गति मन्द रहीं। इस दषक में जनपद की वृद्धि 21.0ः हुई। 1971-81 की दषकीय अवधि में भी जनसंख्या में हास देखा गया जिसमें 19.0ः हास दर्ज की गयी लेकिन 1981-1991 के दषक में 21.9ः वृद्धि देखी गयी 1991-2001 तथा 2001-2011 के दषक में निरंतर जनसंख्या वृद्धि में ह्यस देखा गया जो क्रमषः निम्न है- 12.46ः, 11.0ः
विकासखण्डवार जनपद की जनसंख्या वृद्धि का कालिक विष्लेषण-
जनपद हमीरपुर में विकासखण्डवार कालिक विष्लेषण हेतु 1991-2001 एवं 2001-2011 के मध्य दषकीय जनसंख्या वृद्धि की तुलना प्रस्तुत की गयी है। उपर्युक्त तालिका सेे स्पष्ट होता है कि 1991 से 2001 में दषकीय वृद्धि दर 12.46ः अंकित की गयी जबकि 2001-2011 के मध्य 11.00ः वृद्धि देखी गयी। दषक 1991-2001 के मध्य सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि वाला विकासखण्ड सुमेरपुर (15.57ः) तथा न्यूनतम वृद्धि वाला कुरारा विकासखण्ड (9.11ः) था। इसी प्रकार 2001-2011 के दशक में सर्वाधिक तथा न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि वाला विकासखण्ड क्रमषः मौदहा (17.53ः), राठ (9.46ः) दर्ज किया गया था।
rkfydk 1 tuin gehjiqj esa tula[;k o`f) ¼1901&2011½
|
Ø-la- |
x.kuk o"kZ |
Tkula[;k |
Tkula[;k o`f) ¼%½ |
|
1 |
1901 |
545040 |
0-0 |
|
2 |
1911 |
555941 |
2-0 |
|
3 |
1921 |
532520 |
&4-2 |
|
4 |
1931 |
568702 |
6-8 |
|
5 |
1941 |
647122 |
13-8 |
|
6 |
1951 |
407939 |
&37-0 |
|
7 |
1961 |
502281 |
23-1 |
|
8 |
1971 |
607908 |
21-0 |
|
9 |
1981 |
725603 |
19-0 |
|
10 |
1991 |
884512 |
21-0 |
|
11 |
2001 |
993792 |
12-46 |
|
12 |
2011 |
1104285 |
11-00 |
L=ksr&vkfFkZd ,oa lkaf[;dh foHkkx] jkT; fu;kstu foHkkx] gehjiqj] 2011 p.08
जनसंख्या वृद्धि का स्थानिक विष्लेषण-
दषक 2001-2011 के दौरान दषकीय वृद्धि के आधार पर जनपद हमीरपुर के विकासखण्डों का स्थानिक वितरण निम्नवत् है-
rkfydk& 02 fodkl[k.Mokj tula[;k o`f) ¼1991&2011½
|
Ø-la- |
fodkl[k.M dk uke |
fodkl[k.M tula[;k o`f) (%) |
|
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1991&2001 |
2001&2011 |
||
|
1 |
dqjkjk |
9-11 |
10-59 |
|
2 |
Lkqesjiqj |
15-57 |
17-21 |
|
3 |
Lkjhyk |
10- 36 |
10-94 |
|
4 |
Xkksgk.M |
10-70 |
10-46 |
|
5 |
jkB |
9-28 |
9-46 |
|
6 |
eqLdqjk |
12-56 |
13-78 |
|
7 |
ekSngk |
14-93 |
17-53 |
L=ksr&vkfFkZd ,oa lkaf[;dh foHkkx] jkT; fu;kstu foHkkx] gehjiqj] 2011 p.15-40
(i) अधिक जनसंख्या वृद्धिदर वाले क्षेत्र-
अधिक जनसंख्या वृद्धिदर वाले क्षेत्रों के अन्तर्गत 12ः से अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले विकासखण्ड को सम्मिलित किया गया है। इस विकासखण्ड वर्ग में मौदहा, सुमेरपुर, मुस्कुरा को सम्मिलित किया गया है। यह विकासखण्ड जनपद को जनसंख्या का लगभग 49ः प्रतिनिधित्व करते हैं।
(ii) मध्यम जनसंख्या वृद्धि वाले क्षेत्र-
जनपद में सरीला, कुरारा तथा गोहाण्ड विकासखण्ड 10ः-12ः के मध्य जनसंख्या वृद्धि वाले क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
(iii) अल्प जनसंख्या वृद्धि वाले क्षेत्र-
अल्प जनसंख्या वृद्धि दर वाले क्षेत्र में जनपद का राठ विकासखण्ड 10ः से कम जनसंख्या वृद्धि दर्ज किया। राठ विकासखण्ड की जनसंख्या वृद्धि 9.46ःए 2001-2011 के मध्य अंकित की गयी।
दषकीय वृद्धि दर के विष्लेषण किये जाने पर स्पष्ट होता है कि विकसखण्ड मौदहा, सुमेरपुर, मुस्कुरा में उच्च वृद्धि दर का होना जन्मदर का ऊँचा होना तथा मृत्युदर का कम होना मुख्य कारण है।
जनसंख्या वितरण का कालिक एवं स्थानिक विष्लेषण-
नियतिवादी विचारकों के मतानुसार भूतल पर जनसंख्या के वितरण को प्राकृतिक कारक ही निर्धारित करते हैं जबकि सम्भववादी विचारकों के अनुसार इस पर मानवीय कारकों का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक होता है। वास्तविकता यह है कि धरातल केे किसी भाग में जनसंख्या का अधिक या सघन रूप से पाया जाना अथवा अल्प जनसंख्या या कम सघनता कर का मिलना विभिन्न प्राकृतिक तथा मानवीय कारकों के सामुच्चयिक प्रभाव का परिणाम होता है। प्राकृतिक कारकों में जलवायु, भूविन्यास मिट्टी, खनिज पदार्थ, जलाषय तथा मानवीय कारकों में आर्थिक कारक, सामाजिक-सांस्कृतिक कारक, राजनीतिक कारक तथा जनाकिंकीय कारक महत्वपूर्ण हैं।
जनसंख्या वितरण का कालिक विष्लेषण-
2011 की अंतिम जनगणना रिपोर्ट के अनुसार जनपद हमीरपुर का जनसंख्या घनत्व 258 व्यक्ति/किमी.2 है जबकि 2001 में जनघनत्व 232 व्यक्ति/किमी.2 था। अर्थात् विगत एक दशक में 26 अंक घनत्व की वृद्धि देखी गयी। जनसंख्या घनत्व में यह वृद्धि औद्योगीकरण तथा तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण हुआ है।
जनसंख्या वितरण का स्थानिक विष्लेषण-
जनपद हमीरपुर में जनसंख्या वितरण के स्थानिक विष्लेषण हेतु विकासखण्ड को इकाई माना गया है। जनपद में स्थानिक जनघनत्व विष्लेषण हेतु 2011 को आधार के रूप में लिया गया है।
(i) उच्च जनघनत्व का क्षेत्र (250 व्यक्ति/ किमी.2 से अधिक)-
हमीरपुर जनपद के उन विकासखण्डों को इस वर्ग में शामिल किया गया है जिनका जनघनत्व 250 व्यक्ति/किमी.2 से अधिक है। इसमें सुमेरपुर, मौदहा, मुस्कुरा विकासखण्ड को सम्मिलित किया गया है।
rkfydk&03 fodkl[k.Mokj tula[;k ?kuRo ¼2001&2011½
|
Ø-la- |
fodkl[k.M dk uke |
Tkula[;k ?kuRo |
|
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2001 |
2011 |
||
|
1 |
dqjkjk |
210-60 |
245-03 |
|
2 |
lqesjiqj |
267-28 |
295-76 |
|
3 |
ljhyk |
210-63 |
159-77 |
|
4 |
Xkksgk.M |
208-68 |
205-87 |
|
5 |
jkB |
242-39 |
212-78 |
|
6 |
eqLdjk |
229-94 |
266-44 |
|
7 |
ekSngk |
232-08 |
257-89 |
L=ksr&vkfFkZd ,oa lkaf[;dh foHkkx] jkT; fu;kstu foHkkx] gehjiqj] 2011 p.15-20
(ii) मध्यम जनघनत्व का क्षेत्र (200-250व्यक्ति/किमी.2)-
मध्यम जनघनत्व के अन्तर्गत कुरारा, राठ तथा गोहाण्ड विकासखण्ड को सम्मिलित किया गया है। यहाँ जनसंख्या का जनघनत्व 200-250 व्यक्ति/किमी.2 है।
(iii) निम्न जनघनत्व का क्षेत्र (200 से कम व्यक्ति/किमी.2)-
इस वर्ग के अन्तर्गत जनपद के एक मात्र विकासखण्ड सरीला को रखा गया है। जिसका जनघनत्व 159.77 व्यक्ति/किमी.2 है।
निष्कर्ष-
जनपद की जनसंख्या वृद्धि का कालिक विष्लेषण करने पर निष्कर्ष प्राप्त होता है कि सभी विकासखण्डों में जनसंख्या वृद्धि दर बढ़ी है। 1991-2001 के दषक के मध्य सुमेरपुर तथा कुरारा में अधिकतम तथा न्यूनतम वृद्धि दर मिली तथा तथा 2001-2011 के दषक में इनमें परिवर्तन देखने को मिला अर्थात् अधिकतम तथा न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि क्रमषः मौदहा तथा राठ में देखने को मिली। जनपद के जनसंख्या वितरण के स्थानिक प्रतिरूप के विष्लेषण ये निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि जनपद के सुमेरपुर, मौदहा, मुस्कुरा में जनघनत्व का उच्च सकेंद्रण तथा कुरारा, राठ गोहाण्ड, सरीला में निम्नतम संकेद्रण मिलता है। जनपद के जनसंख्या वृद्धि तथा जनघनत्व वितरण में असमानता है जिसको दूर करके संतुलित विकास करना आवश्यक है। अतः इस असमानता को दूर करने हेतु तत्काल आवष्यक कदम की आवष्यकता है।
संदर्भ ग्रन्थ सूची
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Received on 17.11.2020 Modified on 03.12.2020
Accepted on 17.12.2020 © A&V Publications All right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2020; 8(4):269-273.