किशोर छात्र-छात्राओं में स्वास्थ्य एवं पोषण सम्बन्धी जागरुकता में इण्टरनेट की भूमिका अम्बेडकर नगर जनपद (उ.प्र.) के जहाँगीरगंज विकास खण्ड के संदर्भ में
सोनम चौरसिया1, डॉ. दीप्ति सुनेजा2
1शोध छात्रा, गृहविज्ञान विभाग, गुरुनानक गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर (उ.प्र.)
2एसोसिएट प्रोफेसर, गृहविज्ञान विभाग, गुरुनानक गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर (उ.प्र.)
*Corresponding Author E-mail: sonamchaurasia404@gmail.com
ABSTRACT:
पोषण शिक्षा का क्षेत्र भोजन लेने की पुरानी मानव गतिविधि को एक नए विज्ञान से जोड़ता है। प्रत्येक समाज में भोजन लेने के विभिन्न तरीके हैं तथा इन्हीं तरीकों का पालन उस समाज में आने वाली पीढ़ी भी करती है। वर्तमान समय में इण्टरनेट वह सुलभ माध्यम हैं- जो अच्छे स्वास्थ्य हेतु लोगों की उचित भोजन विकल्प चयन की क्षमता का विकास करने में सहायता करता है। इसके माध्यम से व्यक्ति प्राप्त पोषण जानकारी का मूल्यांकन स्वयं कर सकता है। यह एक व्यक्ति के सीमित संसाधन में सबसे अच्छे उपयोग को बढ़ावा देता है। यह ज्ञान को सुदृढ़ कर पोषण की गलत अवधारणाओं को सही करता है। किशोर छात्र-छात्राओं में उचित स्वास्थ्य और पोषण सम्बन्धित जानकारी का अभाव होने से उनके व्यक्तित्व विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। प्रस्तुत शोध पत्र में किशोर छात्र-छात्राओं में स्वास्थ्य एवं पोषण सम्बन्धी जागरुकता में इण्टरनेट की भूमिका का व्यापक शोध और सर्वेक्षण जनपद अम्बेडकर नगर के जहाँगीरगंज विकास खण्ड के संदर्भ में किया गया है। जिसके लिए प्राथमिक तथा द्वितीय स्रोत से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र उक्त आयु वर्ग (13-18 वर्ष) के छात्र-छात्राओं में स्वास्थ्य और पोषण सम्बन्धी जानकारी में अभिवृद्धि कर सम्पूर्ण विकास में सहायक सिद्ध होगा।
KEYWORDS: किशोर, स्वास्थ्य, पोषण, इण्टरनेट।
INTRODUCTION:
किसी भी देश के विकास के लिए सेहतमंद श्रमपूर्व निर्धारित शर्त है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लोगों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार को हमेशा से उच्च प्राथमिकता दी गई है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 47 कहता है कि ‘‘राज्य अपनी जनता के पोषण और रहन-सहन का स्तर बढ़ाने व सार्वजनिक स्वास्थ्य में बेहतरी को अपना मुख्य कर्तव्य मानेगा। पर्याप्त मात्रा में भोजन या जरूरी पोषण नहीं मिलने से कुपोषण की समस्या पैदा होती है। कुपोषण का अर्थ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से कमजोर होना है। भोजन के उपलब्धता में क्षेत्रीय स्तर पर असमानता रहने और खान-पान के अलग-अलग आदतों के कारण अलग-अलग तरह की कुपोषण समस्या उत्पन्न हुई। ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश और जागरूकता मानव संसाधनों के निवेश के साथ क्षेत्र आधारित कार्य योजना की आवश्यकता है।
पोषण का ज्ञान युवा, बूढ़े, साक्षर-निरक्षर, स्त्री-पुरुष या ग्रामीण- शहरी परिवेश में रह रहे सभी लोगों के लिए आवश्यक है। इसके द्वारा हमें उपयुक्त भोजन ग्रहण करने में मदद मिलती है। पोषण शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा लोगों को पोषण का ज्ञान प्राप्त होता है तथा स्वयं की खाने की आदतों में समुचित परिवर्तन आता है। पोषण शिक्षा सही तरीके से भोजन को चुनने में सक्षम बनाती है। किशोर छात्र-छात्राओं विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी व जागरुकता में अभाव के कारण अपने स्वास्थ्य और पोषण का सही ध्यान नहीं रख पाते हैं जिसके कारण मानव संसाधन का समुचित विकास नहीं हो पाता। स्वास्थ्य और पोषण सम्बन्धी जागरुकता और जानकारी प्राप्त करने में इण्टरनेट एक प्रभावी व सुलभ माध्यम है। प्रस्तुत शोध पत्र में इसी संदर्भ में कि इण्टरनेट उक्त अध्ययन क्षेत्र अम्बेडकरनगर में किस प्रकार और किस सीमा तक किशोर छात्र-छात्राओं में स्वास्थ्य और पोषण जागरुकता में सहायक है।
शोध अध्ययन क्षेत्र:-
अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जनपद है। जिसका जिला मुख्यालय अकबरपुर है। जिसका कुल क्षेत्रफल 2,520 वर्ग किमी. है। 2011 की जनगणना के अनुसार अम्बेडकर नगर की कुल साक्षरता 76.86ः है। जिसमें पुरुष साक्षरता 82.53ः तथा महिला साक्षरता 70.84ः है। क्षेत्र की 88.29ः जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। जिनकी आजीविका का मुख्य साधन कृषि और उससे सम्बन्धित उद्योग है। जिले में लिंगानुपात 976 है जोकि भारत में 1000 पुरुषों पर 940 महिलाओं की तुलना में अधिक है। शोध अध्ययन हेतु 100 किशोर छात्र तथा 100 किशोर छात्राओं (13-18 वर्ष) कक्षा-टप्प्प्, कक्षा-ग्प् तक के छात्रों को सर्वेक्षण के लिए चयन किया गया है।
शोध अध्ययन का उद्देश्य:-
1. किशोर छात्र-छात्राओं में स्वास्थ्य और पोषण सम्बन्धित जानकारी और जागरुकता का अध्ययन करना।
2. स्वास्थ्य और पोषण सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करने में इण्टरनेट की भूमिका का अध्ययन करना।
3. अध्ययन क्षेत्र में इण्टरनेट के माध्यम से स्वास्थ्य और पोषण के संदर्भ में हुए परिवर्तनों का अध्ययन करना।
4. जनप्रतिक्रिया आधारित सुझावों को प्रस्तावित करना।
आंकड़ा स्रोत तथा विधितंत्र:-
प्रस्तुत शोध पत्र में प्राथमिक तथा द्वितीयक स्रोत से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। प्राथमिक आँकड़ों के संग्रह हेतु प्रश्नावली विधि तथा द्वितीय स्रोत के आँकड़ों के संग्रह के लिए विभिन्न सरकारी तथा गैर-सरकारी स्रोत से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए यथा स्थान पर तालिकाओं का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र अम्बेडकर नगर जनपद के फतेह मोहम्मद मेमोरियल इण्टर कॉलेज, जहाँगीरगंज तथा आर.पी.पी.एस. इण्टर कॉलेज जहाँगीरगंज से 100 किशोर तथा 100 किशोरी छात्र-छात्राओं (13-18 वर्ष) का चयन शोध और सर्वेक्षण हेतु किया गया है।
परिणाम एवं परिचर्चा:-
प्रस्तुत शोध पत्र में किशोर छात्र-छात्राओं में स्वास्थ्य एवं पोषण सम्बन्धी जागरुकता में इण्टरनेट की भूमिका का अध्ययन विभिन्न प्रश्नावली के माध्यम से विश्लेषणात्मक और व्याख्यात्मक रूप में किया गया है। जिसके लिए शोध अध्ययन क्षेत्र के दो उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से 100-100 किशोर छात्र-छात्राओं से प्राप्त सूचनाओं का गहन एवं सूक्ष्मता से अध्ययन किया गया है। यह जानने का प्रयास किया गया है कि इण्टरनेट, स्वास्थ्य और पोषण सम्बन्धी जागरुकता के संदर्भ में किशोर वर्ग के छात्र-छात्राओं में कितना सहायक और प्रभावी है। उत्तरदाताओं से प्राप्त अभिमत को निम्नलिखित सारणियों में दर्शाया गया है।
तालिका-1:-
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2- |
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43% |
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10% |
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3- |
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15% |
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10% |
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4- |
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35% |
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10% |
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5- |
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10% |
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6- |
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13% |
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10% |
10% |
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7- |
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03% |
10% |
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8- |
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80% |
10% |
00% |
10% |
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9- |
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17% |
73% |
00% |
10% |
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10- |
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10% |
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11- |
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55% |
35% |
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10% |
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12- |
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20% |
67% |
03% |
10% |
नोट:- उत्तरदाता द्वारा दी गयी जानकारी को पूर्णतः गुप्त रखा गया है।
निष्कर्ष:-
प्रस्तुत शोध लेख में स्वास्थ्य एवं पोषण सम्बन्धी जागरुकता में इण्टरनेट का किशोर छात्र-छात्राओं में प्रभाव का अध्ययन सर्वेक्षण विधि से किया गया है। जिसके अन्तर्गत निम्नलिखित तथ्य प्रकाश में आये हैं। अम्बेडकर नगर जनपद सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है जिससे किशोर छात्र-छात्राओं के बीच इण्टरनेट की पहँुच सीमित है। 45ः छात्रों का मानना है कि इण्टरनेट स्वास्थ्य और पोषण से सम्बन्धित जानकारी की प्राप्ति इण्टरनेट के द्वारा होती है। 33ः लोगों को सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी इण्टरनेट के माध्यम से होती है। उपर्युक्त तालिका के विश्लेषण से क्षेत्र के किशोर छात्र-छात्राओं में इण्टरनेट की पहुँच बहुत सीमित है असमान है। यह असमानता लैंगिक रूप में देखने को मिलती है। छात्राओं को गृहकार्य सहित स्कूल के कार्यों में व्यस्तता के कारण मोबाइल और इण्टरनेट की पहुँच बहुत सीमित है। पारिवारिक दृष्टि से देखें तो रूढ़िवादी प्रवृत्ति के कारण लोग इण्टरनेट को कार्य और अनावश्यक मनोरंजन का कारण मानते हैं जो स्वास्थ्य और पोषण से सम्बन्धित जागरूकता प्रदान करने में बाधक बन रहा है। यद्यपि सरकार तथा गैर-सरकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार से इण्टरनेट के प्रयोग तथा जागरूकता में क्षेत्र के किशोरों में गम्भीर उपयोग तथा कौशल विकास में सहायक सिद्ध हो रहा है।
संदर्भ सूची:-
1- Chandana. R.C. and Sidhu, M.S. 1980 Introduction to Population Geography, Kalyany Publication, New Delhi, P. 39-45
2- District Census Handbook Ambedkar Nagar (2018)
3- अग्रवाल जी.सी. कुलश्रेष्ठ एस.पी. (2017-18), शैक्षिक तकनीकी एवं सूचना सम्प्रेषण तकनीकी’’, अग्रवाल प्रकाशन, पेज नं. 15-37
4- चौरसिया, सोनम, 2019, इण्टरनेट का किशोर छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन’, स्वीकृत शोध प्रस्ताव, छात्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, पेज नं. 1-5
5- सिंह अरूण कुमार (2017), मनोविज्ञान, समाजशास्त्र तथा शिक्षा में शोध विधियाँ, मोतीलाल बनारसीदास, पेज नं. 18-23
6- सिंह, बिंद्रा (2022), बाल विकास, पंचशील प्रकाशन, जयपुर, पेज नं. 51-78
7- शर्मा, कमलेश (2007), बाल विकास, स्टार प्रकाशन, आगरा, पेज नं. 27-81
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Received on 22.06.2023 Modified on 16.07.2023 Accepted on 10.08.2023 © A&V Publication all right reserved Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2023; 11(3):180-183. DOI: 10.52711/2454-2687.2023.00030 |