Author(s): मधुलिका श्रीवास्तव, राकेश कुमार तिवारी

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Address: डाॅ. मधुलिका श्रीवास्तव, राकेश कुमार तिवारी
सहप्राध्यापक (समाजशास्त्र), शा.ठा.रण. सिंह महाविद्यालय रीवा (म.प्र.)
शोधार्थी (समाजशास्त्र), शा.ठा.रण. सिंह महाविद्यालय रीवा (म.प्र.)
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 7,      Issue - 2,     Year - 2019


ABSTRACT:
वर्तमान समाज सामाजिक संबंधों का न होकर सेलफोन अर्थात् मोबाईलफोन का जाल बन चुका है। इसकी उपयोगिता तथा प्रभाव का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सन् 2000 से आरम्भ होकर वर्तमान समय तक के मध्य भारत में सेलफोन का उपयोग समाज के उच्च तबकों से आरम्भ होकर निम्नतम तबकों तक, सरकारी - गैर-सरकारी संस्थानों में, बूढ़ों तथा बच्चों तक सभी में समान रूप से पर्याप्त प्रचलित हो चुका है। इस प्रसिद्धि, प्रचलन तथा प्रयोग ने सचलयंत्र यानि सेलफोन को जहां एक ओर समाज को जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में स्थापित किया है, वहीं दूसरी ओर यह समाज की चिन्ता का भी विषय बन गया है। आज भारत में लगभग 27 करोड़ मोबाइल फोन उपभोक्ता है। भारत के हर चैथे आदमी के पास मोबाइल फोन है। एक आंकलन के अनुसार भारत में हर घंटे 10 हजार मोबाइल सेट बिक रहें हैं। पिछले ही दिनों मोबाइल फोन उपभोक्ता की संख्या के लिहाज से भारत ने अमेरिका का पीछे छोड़ा है। अब सिर्फ चीन भारत से आगे है। भारत में औसतन एक परिवार में एक से ज्यादा मोबाइल फोन है। एक जमाना था जब मोबाइल फोन का मतलब सिर्फ इतना था कि इससे फोन किया और सुना जा सकता था हालाकि तब भी यह एक आश्चर्य की तरह था क्योंकि इसे हाथ में लेकर कहीं भी आ-जा सकते हैं।1 लेकिन अब मोबाइल फोन का उपयोग बदल गया है। अब सिर्फ फोन करने या सुनने का साधन नहीं बल्कि यह एक साथ कई इलेक्ट्रानिक्स गैजेटर्स का काम करता है।2 अंततः तात्पर्य यह हुआ कि जब हम किसी वस्तु का आवश्यकता से अधिक उपयोग करते हैं तो वह हमारे ऊपर प्रभाव भी अधिक डालता है। मोबाइल फोन का उपयोग भी चाहे कम करें या अधिक वह भी हमारे सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। मनोवैज्ञानिक प्रभाव को यदि जानने की कोशिश करें तो समाज का हर वर्ग मोबाइल फोन के कारण तनाव महसूस करता है। कभी अनावश्यक एस.एम.एस. के कारण तो कभी असमय काॅल के कारण, क्योंकि हम हमेशा किसी भी सूचना के लिए तैयार नहीं हो सकते।


Cite this article:
मधुलिका श्रीवास्तव, राकेश कुमार तिवारी. वर्तमान समाज पर मोबाईल/सेलफोन का प्रभाव. Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):537-543.


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