Author(s): नितेश कुमार मिश्रा

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Address: नितेश कुमार मिश्रा सहायक प्राध्यापाक, प्रा. भा. इति. सं. एवं पुरा. अध्ययन शाला, पं. रविशंकर शुक्ल वि. वि. रायपुर (छ.ग.)

Published In:   Volume - 2,      Issue - 1,     Year - 2014


ABSTRACT:
वैदिक काल उस काल को कहा जाता है जिस काल में वेदों की रचना हुई। सामान्य रूप से वैदिक काल का समय 1500-600 ठण्ब्ण् माना जाता है। वेदों की संख्या चार है ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद, वेद मूलतः धार्मिक ग्रंथ है परन्तु उनसे अन्य सूचनाएं भी प्राप्त होती है। वेदों से उस काल के विज्ञान सम्बन्धित सूचनाएं भी प्राप्त हाती हैं जो इस प्रकार है- कृषि:- भारत एक कृषि प्रधान दे है प्राचीन काल से ही यहां पर अनेकों प्रकार की कृषि की जाती थी। ऋग्वेद में उल्लिखित है कि जंगलांे को साफ करके खेती करनी चाहिए। हल का प्रयोग इस देश में आदि काल से ही होता आ रहा है हलों को दो से लेकर बारह बैल तक खींचते थे जिससे गहरी जोताई की जाती थी। खेती की अनेक विधियों के विषय में, वेदों से सूचनाएं प्राप्त होती है वे लोग जोताई, बुआई, निराई, सिचाई तथा कटाई और अन्त में मढ़ाई करते थे। हल के विभिन्न भागों का भी उल्लेख वैदिक संहिताओं में मिलता है। चारों वेदों से गेंहूं, जौ, उरद, मूंग आदि अनाजों के विषय में सूचना मिलती है। ऋग्वेद के अंतिम मण्डल में धान का भी उल्लेख हुआ है। ऋग्वेद तथा दूसरे संहिताओं में कृषि उपकरणों का भी उल्लेख मिलता है, जैसे- द्रोण, अश्मचक्र, सूप, चलनी, सिल-लोढ़ा आदि।


Cite this article:
नितेश कुमार मिश्रा. वैदिक कालीन विज्ञान. Int. J. Rev. & Res. Social Sci. 2(1): Jan. – Mar. 2014; Page 31-33.


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