Author(s): बी. एल. सोनेकर

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Address: बी. एल. सोनेकर सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्लविश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़

Published In:   Volume - 2,      Issue - 2,     Year - 2014


ABSTRACT:
निःसंदेह महिला अस्वस्थ होती है, तो इसका दुष्प्रभाव उसके संतान एवं परिवार पर पड़ता है। महिला अस्वस्थता अक्सर गरीबी, अज्ञानता, जागरूकता का अभाव और चिकित्सकीय सुविधा के अभाव में होता है। चूँकि महिला को ही समाज तथा परिवार का आधार कहा जाता है, यदि महिलाएँ ही अस्वस्थ है, तो एक उज्जवल और निरोगी समाज की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। अतः महिला विकास हेतु यह एक अनिवार्य घटक है। अध्ययन का महत्व स्वास्थ्य मानव विकास सूचकांक का एक महत्वपूर्ण सूचक है। आजादी के बाद से ही सरकार के समक्ष महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार एक महत्वपूर्ण चुनौती रहा है। विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की जहाँ आज की उचित चिकित्सा का अभाव पाया जाता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या का 48.4 प्रतिशत जनसंख्या महिलाएँ हैं, जिसमें अधिकतर महिलाओं की मृत्यु चिकित्सा के अभाव के कारण होती है। चाहे वह प्रसव के दौरान हो, एच.आई.वी. से संबंधित हो या एनिमिया से ग्रसित हो। यह सच है कि विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। यही कारण है कि जहाँ वर्ष 1947 में जीवन प्रत्याशा 32 वर्ष थी, वह बढ़कर 66 वर्ष पहुॅच चुकी है; लेकिन यह भी सच है आज इस समय स्वास्थ्य पर 1.4 प्रतिशत व्यय किया जा रहा है, जबकि बारहवीं पंचवर्षीय योजना में इस व्यय को 2.5 प्रतिशत करने का प्रावधान है, फिर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदण्डों से काफी पिछड़े है। यह दुर्भाग्य है कि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर कुल सरकारी व्यय ळक्च् के 1 प्रतिशत से भी कम है और इसे 2 या 3 प्रतिशत तक बढ़ाने की आवश्यकता है।


Cite this article:
बी. एल. सोनेकर. महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Int. J. Rev. & Res. Social Sci. 2(2): April-June 2014; Page 124-127.


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