Author(s): हेमन्त कुमार खटकर, रेखा नरेन्द्र जिभकाटे, नवखरेद्ध, कु. समीना कुरैषी

Email(s): aadarshhemant@gmail.com

DOI: Not Available

Address: हेमन्त कुमार खटकर1, डाॅॅ. रेखा नरेन्द्र जिभकाटे
नवखरेद्ध2, कु. समीना कुरैषी1
1PhD Scholar, Shri Rawatpura Sarkar University, Dhaneli, Raipur (C.G.).
2Guide, Shri Rawatpura Sarkar University, Dhaneli, Raipur (C.G.).
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 8,      Issue - 1,     Year - 2020


ABSTRACT:
भारत में षिक्षा को उस प्रकाष स्त्रोत की संज्ञा दी गई, जो मानव के प्रत्येक क्षेत्र में सच्चा पथ प्रदर्षन करती है। षिक्षा मानवीय मूल्य उद्घृत करते हुए विभिन्न वर्ग संघर्षों तथा क्षेत्रीयता जैसी बुराईयों कांे दूर कर समानता की भावना पल्लवित करती है। षिक्षा प्रकाष करती है और हमें तेजस्वी बनाती। अन्तर्निहित शक्तियों को प्रस्फुटित और विकसित करती हैं, संपूर्ण मानव का उत्थान करती है। हमारे व्यवहार को उत्तम बनाती है और हमें सम्पूर्णता की ओर अग्रसर करती है। ज्ञान का संचय और संग्रहण करती है, अच्छा होने और करने के लिए प्रशिक्षित करती है। सत्यम, शिवम एवं सुन्दरम के गुणों को आत्सात कराती है,कर्तव्य की भावना से हमारे ज्ञान चक्षु खोलती है। पालन-पोषण करती है और ”कल्प वृक्ष” के समान हमारे सभी इच्छाओं को पूर्ण करती है। इसके द्वारा ऐसे वातावरण का सृजन अभीष्ट है, जिसके व्यक्ति अपनी नैसर्गिक क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सके तथा बदलते हुए परिवेश से अनुकूलन व समायोजन कर अपने विचार,कार्य एवं कृति रूपी पुष्प की खुशबू दूर-दूर तक फैला सके तथा समाज एवं राष्ट्र के निर्माण एवं विकास में सक्रिय योगदान दे सकें। शासन के द्वारा शिक्षा में सुधार एवं बालिकाओं को प्रोत्साहित तथा शिक्षा के स्तर को सुधारने एवं किशोरियों के व्यक्तितव प्रकार और अध्ययन आदतों के विकास के लिए सरकार के द्वारा अनेकों योजना एवं शालाओं में विभिन्न प्रकार के गतिविधियों को संचालित करने दिशा निर्देश दिया जाता है, जिससे प्रेरित होकर बालिकाएं अत्यधिक मात्रा में शाला को पहुचें इस प्रकार के क्रियाकलापों से किशोरी बालिकाओं के व्यक्तित्व प्रकार, अध्ययन आदतो में सार्थक विकास हो सके। किशोरियों के अध्ययन आदतों का व्यक्तितव प्रकार के परिपेक्ष्य में अध्ययन हेतू शोधकर्ता के द्वारा यह शोध किया गया। अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया कि शोधकर्ता ने अध्ययन में छत्तीसगढ के शासकीय एवं अशासकीय शालाओं के 120 किशोरियों का स्वतत्र चर के अंतर्गत व्यक्तित्व प्रकार एवं आश्रित चर के अंतर्गत अध्ययन आदतों का चयन ”यादृच्छिक प्रतिदर्शन” आधार पर किया। जिसका परिणाम अंतर्मुखी किशोरियों का प्रतिशत 23.33. उभयमुखी किशोरियों का प्रतिशत 45, बहिर्मुखी किशोरियों का प्रतिशत 31.87 है। अंतर्मुखी किशोरियों का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है। बहिर्मुखी किशोरियों का प्रतिशत अंतर्मुखी किशोरियों की में अधिक है।उभयमुखी व्यक्तित्व का प्रतिशत सर्वाधिक है। अंतर्मुखी एवं उभयमुखी किशोरियों के अध्ययन में सार्थक अंतर है तथा अंतर्मुखी किशोरियों का अध्ययन आदत उभयमुखी किशोरियों से बेहतर है। अंतर्मुखी एवं बहिर्मुखी किशोरियों के अध्ययन आदत में सार्थक अंतर है तथा अंतर्मुखी किशोरियों का अध्ययन आदत बहिर्मुखी किशोरियों से बेहतर है। उभयमुखी एवं है। बहिर्मुखी किशोरियों के अध्ययन में सार्थक अंतर है तथा उभयमुखी किशोरियों के अध्ययन आदत बहिर्मुखी किशोरियों से बेहतर है।


Cite this article:
हेमन्त कुमार खटकर, रेखा नरेन्द्र जिभकाटे ;नवखरेद्ध, कु. समीना कुरैषी. किशोरियों के अध्ययन आदतों का व्यक्तित्व प्रकार के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन. Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2020; 8(1):45-48.


संदर्भित ग्रंथः-
1. उपाध्याय, भवानी शंकर (1983) कार्ल गुस्ताव यूंग विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान, प्रथम संस्करण, राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृ.14, 69-73।
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4. गुप्ता, डाॅ. एस. पी. और गुप्ता, डाॅ. अलका (2011) उच्चतर माध्यमिक मनोविज्ञान, शारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद, पृ.238-239।

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