Author(s): हर्षा पाटिल, अब्दुल सत्तार, गैंद दास मानिकपुरी

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Address: डाॅ. हर्षा पाटिल1, डाॅ. अब्दुल सत्तार2, श्री गैंद दास मानिकपुरी3
1सहायक प्राध्यपिका, कंिलंगा विष्वविद्यालय, नया रायपुर.
2विभागाध्यक्ष, कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा.
3सहायक प्राध्यपक, समाधान महाविद्यालय, बेमेतरा.
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 8,      Issue - 4,     Year - 2020


ABSTRACT:
शिक्षा जन्म से मृत्युपर्यनत चलने वाली प्रक्रिया है। षिक्षा के माध्यम से बालक या व्यक्ति स्वंय को ज्ञान और अनुभव का धनी बनाता है। ज्ञान, अनुभव और समायोजन द्वारा वह अपने व्यवहार को परिवर्तित कर समय उपयोगीसिद्ध और कल्याणकारी बनाता है। अतःहम कह सकते हैं,कि षिक्षा मानव चेतना का ज्योर्तिमय सांस्कृतिक पक्ष है,जिससे व्यक्तित्व का बहुमुखी विकास होता है।


Cite this article:
हर्षा पाटिल, अब्दुल सत्तार, गैंद दास मानिकपुरी. ग्रामीण महिला स्वसहायता समूह के विकास में षिक्षा के महत्व का अध्ययन. Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2020; 8(4):256-264.

Cite(Electronic):
हर्षा पाटिल, अब्दुल सत्तार, गैंद दास मानिकपुरी. ग्रामीण महिला स्वसहायता समूह के विकास में षिक्षा के महत्व का अध्ययन. Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2020; 8(4):256-264.   Available on: https://ijrrssonline.in/AbstractView.aspx?PID=2020-8-4-7


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