Author(s): प्रीति साकेत

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Address: प्रीति साकेत
शोधार्थी (वाणिज्य) शास. ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा (म.प्र.)
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 7,      Issue - 3,     Year - 2019


ABSTRACT:
भारत एक विकासशील देश है। जिसमें औद्योगिकीकरण का महत्वपूर्ण स्थान है। औद्योगिक क्षेत्रों में कार्य करने वाली श्रमिकों की कार्य क्षमता बढ़ाया जाना आवश्यक है, क्योंकि औद्योगिक विकास को संचालित करने के लिए श्रम शक्ति एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। भारत में एक जन संख्या प्रधान देश है तथा मानव संसाधन का प्रयोग लगभग प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्रों में होता है, क्योंकि श्रमिक मनुष्य होने के कारण उसमें चैतन्यता, गतिशीलता एवं संवेदनशीलता पाई जाती है। उसके द्वारा किए जाने वाले कार्यो में गुणवत्ता और विशेषता लाने के लिए श्रमिकों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। द्वितीय युद्ध के बाद मक्र्स द्वारा श्रमिकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का विचार प्रकट किया गया था तथा श्रमिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं विभिन्न देशों के सरकारों द्वारा बनाई एवं कार्यान्वित की गई। भारत में भी कल्याणकारी योजनाएं श्रमिकों के लिए बनाई गई इससे श्रम प्रबंध सबंध मधुर एवं प्रगाढ़ बनते है। श्रमिकों के उत्तरदायित्व का भाव पैदा होता है तथा औद्योगिक सहभागिता में अपना योगदान देने के लिए तत्पर रहते है। संगठित क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों का कल्याण प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं के अनुरूप एक आवश्यक कार्य है। श्रम संघों का गठन श्रमिकों की समस्याओं को सुनने एवं उनके अनुरूप कल्याणकारी कार्यो का अंजाम देने के श्रम कानून का निमार्ण किया गया। श्रम न्यायालय जिनमें श्रमिकों की ओर से मुख्य कानूनी सहायता शासन द्वारा पहुॅचायी जाती है। वर्तमान में श्रम कल्याण औद्योगिक क्षेत्र का अन्य महत्वपूर्ण कार्यो के समान माना जाता है तथा किसी औद्योगिक क्षेत्र की सफलता बिना श्रम कल्याण के संभव नहीं है। प्रस्तुत शोध इसी उद्देश्य से किया गया है। कि संगठित क्षेत्र में सतना जिले के श्रमिकोजिनमें महिला एवं पुरूष दोनों सम्मिलित है की कल्याण के लिए जो शासकीय योजनाएं बनाई गई है वे कहां तक लाभकारी रही है। कल्याणकारी योजनाओं का सही मूल्यांकन करना एवं उनका विश्लेषणात्मक अध्ययन करना इस शोध का प्रमुख उद्देश्य है।


Cite this article:
प्रीति साकेत. संगठित औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों हेतु कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन (सतना जिले के विशेष संदर्भ में). Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(3):667673.


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