Author(s): अर्चना सेठी

Email(s): archanasethi96@gmail.com

DOI: Not Available

Address: डाॅ अर्चना सेठी
सहायक प्राध्यापकए अर्थशास्त्र अघ्ययनशालाए पं रविशंकरशुक्ल विश्वविद्यालयए रायपुर
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 7,      Issue - 2,     Year - 2019


ABSTRACT:
आर्थिक विकास अनेक तत्वों से प्रभावित होता है जनसंख्या उनमें से प्रमुख तत्व है। जनांकिकीय प्रवृतियां किसी भी देश की विकास को प्रभावित करता है। जनांकिकीय प्रवृतियां किसी देश के शासकीय नीतियों को प्रभावित करता है तथा स्वयं प्रभावित भी होता है। क्षेत्रीय विकास के साथ जनसंख्या उस ओर आकर्षित होती है जहां औद्योगीकरण एवं नगरीकरण होता है। जनसंख्या के वितरण प्रतिरूप पर सामाजिक आर्थिक कारण लिंगानुपात जन्म दर मृत्यु दर एवं प्रवास प्रभाव डालते है। जलवायु, भैगोलिक स्थिति, उच्चावचन, फसलों की प्रकृति, मिट्टी की उर्वरता आदि भी जनसंख्या वितरण को प्रभावित करते है। लिंगानुपात से किसी क्षेत्र के विकास के स्तर का ज्ञान हो सकता है, अधिक विकसित देशों में लिंगानुपात अधिक होती है, तथा पिछड़े देशों में लिंगानुपात कम होती है।जनसंख्या घनत्व एवं आथर््िाक विकास में कोई सीधा संबंध नहीं हैे। मैदानी क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व अधिक एवं पहाडी तथा वन क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व कम है।मैदानी क्षेत्र में औद्योगीकरण अधिक होना भी अधिक घनत्व का कारण है। भारत की 8ण्6 प्रतिशत जनसंख्या जनजाति है। भारत का विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक जनजातियों का विकास न हो। भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में जनजातियों को बराबरी का हक नहीं मिल सका।इसके लिए सरकार की नीतियों को ही दोष नही दे सकते इसके लिए जनजातियों की अलग रहने की प्रवृति एवं अपनी विशिष्ट संस्कृति है। विश्व बैंक के अनुसार बेहतर स्वास्थ्य केवल बीमारी एवं कुपोषण से मुक्ति से प्राप्त नहीं होगा बल्कि शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक उन्नति से प्राप्त होगा।जनजाति समाज जंगल में निवास करता है। जनसंख्या शिक्षा गरीबी के आंकडों से यह स्पष्ट है कि मानव विकास में जनजाति समाज बहुत पिछडा हुआ है जनजाति जनसंख्या की दृष्टि से अफ्रीका के बाद भारत दूसरा बडा देश है। देश की कुल आबादी में जनसंख्या आयोग 2011 के अनुसार जनजाति जनसंख्या का प्रतिशत 8ण्2 है। अकेले छत्तीसगढ में जनजाति जनसंख्या का 32 प्रतिशत निवास करती है। किसी समाज के विकास एवं सामाजिक संरचना का सबसे बडा पैमाना स्त्री पुरुष अनुपात होता है। इस मामले में जनजाति समाज प्रगतिशील है जनगणना 2011 के अनुसार देश के स्त्री पुरुष अनुपात 940 की तुलना में जनजातियों में स्त्री पुरुष अनुपात 990 है।


Cite this article:
अर्चना सेठी. अनुसूचित जनजातियों की जनांकिकीय प्रवृत्तियां एवं आर्थिक विकास पर प्रभाव. Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):419-425.


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